इंस्टीट्यूशनल लैंड स्कैम के लाभार्थी जीएल बजाज सहित 13 इंस्टीट्यूशन को करना होगा 2377 करोड़ रुपये का भुगतान यमुना प्राधिकरण ने भेजा नोटिस

जीएल बजाज सहित 13 इंस्टीट्यूशन को नोटिस भेज कर समस्त बकाये का भुगतान 15 अक्टूबर से पहले करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर इन संस्थानों के जमीन आवंटन निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। प्राधिकरण के नोटिस के बाद से इन संस्थानों के प्रबंधकों में हड़कंप मचा हुआ है। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन 13 आवंटियों को नोटिस जारी किया गया है यदि उन्होंने पैसा जमा नहीं किया तो सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विजय मिश्रा ( उदय भूमि ब्यूरो)
ग्रेटर नोएडा। सपा बसपा की पुरानी सरकार में अधिकारियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार की मलाई चाटने वालों के दिन खराब चल रहे हैं। इंस्टीट्यूनल लैंड स्कैम के लाभार्थी संस्थानों का दीवाली से पहले दिवाला निकलेगा। यमुना प्राधिकरण ने अनुचित लाभ हासिल करने वाले जीएल बजाज सहित 13 इंस्टीट्यूशन को नोटिस भेज कर समस्त बकाये का भुगतान 15 अक्टूबर से पहले करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर इन संस्थानों के जमीन आवंटन निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। प्राधिकरण के नोटिस के बाद से इन संस्थानों के प्रबंधकों में हड़कंप मचा हुआ है। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन 13 आवंटियों को नोटिस जारी किया गया है यदि उन्होंने पैसा जमा नहीं किया तो सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विदित हो कि वर्ष 2009 में यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान बनाने के लिए यमुना अथॉरिटी ने भूमि आवंटन किया था। तब उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की मायावती सरकार थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद यह घोटाला बाहर आया। वर्ष 2018 में इंस्टीट्यूशन संस्थानों के जमीन आवंटन के मामले की जांच करवाई गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आवंटन के समय यमुना प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल हुआ। जांच रिपोर्ट के मुताबिक यमुना अथॉरिटी की संस्थागत श्रेणी में आवंटन दरें 2,670 रुपये प्रति वर्गमीटर थीं। लेकिन 13 शिक्षण संस्थानों को महज 1,629 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर भूमि का आवंटन कर दिया गया। मजेदार बात यह भी है कि जिस जमीन का आवंटन इन संस्थानों को 1,629 रुपये की दर से हुआ था उस जमीन किसानों के बदले किसानों को 2,500 प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया गया। ऐसे में यह एक बड़ा घोटाला था जिसमें यमुना प्राधिकरण को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

न्याय विभाग की रिपोर्ट के बाद सरकार ने दिया रिकवरी का आदेश
मुआवजा दर और प्रचलित आवंटन दर से कम दर पर यह इंस्टीट्यूशन को जमीन का आवंटन किया गया। यमुना प्राधिकरण बोर्ड ने जमीन आवंटन को अनुचित करार दिया। बोर्ड ने आवंटियों से अतिरिक्त पैसे के रिकवरी और पैसा नहीं देने पर आवंटन निरस्त करने की सिफारिश की। इन सिफारिशों को प्रदेश सरकार को भेजा गया। प्रदेश सरकार ने राज्य के न्याय विभाग से जांच रिपोर्ट और प्राधिकरण बोर्ड की सिफारिशों पर मंतव्य मांगा था। न्याय विभाग ने यह माना है कि जमीन की अधिग्रहण दर और डेवलपमेंट चार्जेस को जोड़कर अलॉटमेंट रेट तय होता है। उस वक्त यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों ने गलत फैसला लिया। आवंटन दरें भूमि अधिग्रहण की दर से भी कम रखी गई थीं। ऐसा में यह साफ साफ प्रतीत होता है कि कुछ चुनिंदा संस्थाओं को फायदा पहुंचाने के लिए उस समय के प्राधिकरण अधिकारियों ने गलत ढंग से जमीन का आवंटन कियाा। ऐसे में अनुचित लाभ हासिल करने वाले इन आवंटियों से अतिरिक्त पैसा वसूल किया जाना चाहिए।

प्राधिकरण के सेक्टर 17ए में आवंटित हुई थी जमीन
यमुना प्राधिकरण ने सेक्टर-17ए में निर्धारित दर से कम दाम पर इन 13 इंस्टीट्यूशनल संस्थानों को जमीन का आवंटन किया था। वर्ष 2009 में संस्थागत, आईटी, आईटीएस, बायोटक, रिक्रिएशनल ग्रीन, सर्विस आदि श्रेणी के 13 भूखंड आवंटित किए थे। योजना के नियमों के अनुसार, भूखंड के 75 प्रतिशत में कोर गतिविधि करनी थी। इसके अलावा 10 प्रतिशत में व्यावसायिक, 10 प्रतिशत में ग्रुप हाउसिंग व 5 प्रतिशत में संस्थागत की अनुमति थी। उस समय जमीन की आवंटन दर 2670 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। बावजूद इसके आवंटन समिति ने 1629 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से भूखंड आवंटित कर दिए। यानी तय दर से भी कम मूल्य में आवंटन के कारण प्राधिकरण को 1041 रुपये प्रति वर्गमीटर का नुकसान हुआ।

13 आवंटियों से होगी 2377 करोड़ रुपये की वसूली
2018 में इन 13 इंस्टीट्यूशनल आवंटियों से बतौर अंतर धनराशि 982.85 करोड़ रुपए लेने हैं। इसके अलावा लीज रेंट, 64.7 प्रतिशत अतरिक्त मुजावजा आदि समेत कुल 2377 करोड़ रुपये वसूल किए जाने हैं। जिन आवंटियों से पैसा लिया जाना है, उसमें त्याग बिल्डस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, एमएमए ग्रेन्स मिल्स प्राइवेट लिमिटेड, शकुंतला एजुकेशनल सोसायटी, शांति एजुकेशनल सोसायटी, बाबू बनारसी दास ट्रस्ट, सतलीला एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट, मारुति एजुकेशनल ट्रस्ट, जीएल बजाज एजुकेशनल ट्रस्ट, एक्सआइएमए एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, एसके कॉन्ट्रेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रलेखा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, इंडियन नॉलेज सिटी एचपीएस और आईटी सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

किस पर कितना बकाया
त्याग बिल्डस्पेस प्राइवेट लिमिटेड – 156.45 करोड़ रुपए
एमएमए ग्रेन्स मिल्स प्राइवेट लिमिटेड – 143.62 करोड़ रुपए
शकुंतला एजुकेशनल सोसायटी – 180.20 करोड़ रुपए
शांति एजुकेशनल सोसायटी – 127.67 करोड़ रुपए
बाबू बनारसी दास ट्रस्ट – 69.75 करोड़ रुपए
सतलीला एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट – 375.67 करोड़ रुपए
मारुति एजुकेशनल ट्रस्ट – 394.05 करोड़ रुपए
जीएल बजाज एजुकेशनल ट्रस्ट – 90.24 करोड़ रुपए
एक्सआइएमए एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड – 76.61 करोड़ रुपए
एसके कॉन्ट्रेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड – 121.44 करोड़ रुपए
चंद्रलेखा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड – 251.38 करोड़ रुपए
इंडियन नॉलेज सिटी – 238.65 करोड़ रुपए
एचपीएस आईटी सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड – 151.48 करोड़ रुपए