आलोक प्रियदर्शी की सोच, अब सुलझेंगे रिश्तों के उलझे तार

-पारिवारिक विवादों का हल अब थानों में नहीं, काउंसलिंग से होगा समाधान
-गाजियाबाद में परिवार परामर्श केंद्रों की सुविधाएं बढ़ीं

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। छोटे-छोटे पारिवारिक मतभेद जो कभी पुलिस केस और कोर्ट-कचहरी तक जा पहुंचते थे, अब उन्हें सुलझाने की राह और भी सहज हो गई है। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने परिवार परामर्श केंद्रों की भूमिका को सशक्त बनाते हुए जिले में चल रही काउंसलिंग सुविधाओं का विस्तार किया है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी के निर्देशन में अब ये केंद्र रिश्तों की उलझनों को संवेदनशीलता और समझदारी से सुलझाने का माध्यम बनते जा रहे हैं। अब थानों या महिला थाने में आने वाले पारिवारिक विवाद सीधे परिवार परामर्श केंद्र को भेजे जाएंगे। इन केंद्रों में काउंसलरों की संख्या बढ़ाकर 5 से 10 कर दी गई है, और उनके लिए नए व्यक्तिगत केबिन भी बनाए गए हैं, जिससे बातचीत गोपनीय और आरामदायक माहौल में हो सके।

मार्च में पिंक बूथ पर शुरू किए गए परामर्श केंद्रों पर अब काउंसलिंग बंद की जा रही है, लेकिन इन बूथों को एंटी रोमियो स्क्वायड की तजऱ् पर महिला सुरक्षा, छात्राओं से छेड़छाड़ की रोकथाम, और महिला जागरूकता से संबंधित जिम्मेदारियों में लगाया जाएगा। पिछले वर्ष परिवार परामर्श केंद्र में 695 मामले आए, जिनमें से 127 मामलों में सफल सुलह कराई गई। वर्ष 2025 में अभी तक 634 मामले दर्ज, 56 मामलों में समझौता, अन्य पर काउंसलिंग जारी। केंद्र में हर दिन औसतन 15 से 20 आवेदन आ रहे हैं। तीन चरणों की काउंसलिंग के बाद भी यदि सहमति न बने तो मामले को अदालत या पुलिस केस में बदला जाता है।

आलोक प्रियदर्शी, एडीशनल पुलिस कमिश्नर

पारिवारिक विवादों का समाधान केवल कानूनी प्रक्रिया से नहीं, संवेदनशील संवाद से संभव है। हमारी कोशिश है कि हर घर में शांति और सामंजस्य बना रहे। इसी उद्देश्य से परिवार परामर्श केंद्रों की व्यवस्थाओं को सशक्त किया जा रहा है। काउंसलिंग की सुविधा बढ़ाकर हमने लोगों को एक सुरक्षित, गोपनीय और समझदारी भरा मंच देने का प्रयास किया है, जहां रिश्तों को टूटने से पहले जोड़ा जा सके।
आलोक प्रियदर्शी, एडीशनल पुलिस कमिश्नर