बिजली विभाग में करोड़ों का घोटाला, छोटा प्यादा गिरफ्तार

– गाजियाबाद जोन के विद्युत वितरण खंड-सप्तम में हुआ साढ़े 5 करोड़ रुपये से अधिक का गबन, बाबू से लेकर बड़े अधिकारी तक हैं भ्रष्टाचार के खेल में शामिल
– रसूखदार चीफ इंजीनियर आरके राणा के चहेते अधिकारियों को बचाने की चल रही है कवायद, बिजली विभाग में चलता है आरके राणा का सिक्का
– बड़ा सवाल प्रत्येक महीने अधिशासी अभियंता करते हैं कैशबुक और बैंक स्टेटमेंट का मिलान फिर एक मामूली कैशियर कैसे कर सकता है साढ़े 5 करोड़ों रुपये से अधिक का गबन

विजय मिश्र (उदय भूमि ब्यूरो) 
गाजियाबाद। भ्रष्टाचार के काजल की कोठरी के रूप में बदनाम बिजली विभाग में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का बड़ा खेल हुआ है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण के सबसे भ्रष्ट जोन कहे जाने वाले गाजियाबाद के विद्युत वितरण खंड सप्तम में साढ़े 5 करोड़ रुपये से अधिक का खेल हो गया। पहले तो मामले को दबाने की कोशिश हुई। लेकिन जब लगा कि भांडा फूट सकता है तो आनन-फानन में एफआईआर दर्ज कराकर मामले को हल्का बनाने की कोशिश हुई। भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल में बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए विभाग में तैनात कैशियर को आरोपी बना दिया गया। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने सोचा कि कैशियर फरार रहेगा और पूरा आरोप कैशियर के मत्थे मढ़कर बड़े और चहेते अधिकारियों को बचा लिया जाएगा। लेकिन दोनों फरार आरोपी अब पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। ऐसे में इन अधिकारियों को अब यह डर सता रहा है कि पुलिस जांच में कहीं उनका भांडा ना फूट जाये। बहरहाल वरिष्ठ अधिकारी के मंसूबे सफल होंगे कि नहीं यह तो अभी नहीं कहा जा सकता। लेकिन बदनाम गाजियाबाद जोन के इस बड़े खेल की गुंज मेरठ से लेकर लखनऊ तक पहुंच गई है। गाजियाबाद जोन के चीफ इंजीनियर आरके राणा की गिनती रसूखदार अधिकारियों में होती है। मंत्री तक गहरी पैठ होने के कारण विभाग में उनके खिलाफ कोई कुछ बोलने से भी डरता है। लेकिन इस बार उनके जोन में हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की चर्चा लखनऊ में भी खूब हो रही है। लंबे समय तक गाजियाबाद और नोएडा को कंट्रोल करने वाले आरके राणा की इस मामले में किरकिरी हो रही है और उनके रसूख पर भी चोट पहुंचा है। पुलिस ने विद्युत वितरण निगम सप्तम खंड के फरार निलंबित हेड कैशियर समेत 2 आरोपी को गिरफ्तार किया है। सिहानी गेट थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण गोपाल शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपए का गबन करने के आरोपी हेड कैश्यिर सुमित गुप्ता निवासी मेरठ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस प्रकरण में फरार चल रहे निलंबित हेड कैश्यिर सुमित गुप्ता और सचिन शर्मा पुत्र कृष्ण गोपाल शर्मा निवासी बुढ़ाना गेट कोतवाली मेरठ को दीवान अस्पताल के पास पटेल नगर से गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि इस मामले में विद्युत वितरण खंड सप्तम में तैनात कई अधिकारियों को शक के घेरे में रखा गया है। साढ़े 5 करोड़ रुपए से अधिक का गबन हो और अधिकारियों को इसकी भनक न लगे यह बात किसी के गले नहीं उतर रहा है। कैश बुक रजिस्टर और बैंक स्टेटमेंट का प्रत्येक माह मिलान कराने की जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता की होती है। अधिशासी अभियंता द्वारा ऐसा किया भी जाता है। ऐसे में सिर्फ एक कैशियर इतना बड़ा गबन कैसे कर सकता है। क्योंकि इतना अधिक कैश कई महीनों के बाद ही कैशियर के पास जमा होगा। ऐसे में यह बात तो तय है कि बड़ा खेल हुआ है और कई चीजें छुपाई जा रही है। पकड़े गये आरोपियों के पास से सिर्फ 11.52 लाख रुपए बरामद किए गए हैं। 15 दिसंबर को विद्युत वितरण खंड सप्तम पटेल नगर के अधिशासी अभियंता एसपी सिंह ने सिहानी गेट थाने में इन दोनों आरोपियों पर गबन का आरोप लगाकर शिकायत की थी, जिसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई थी। एसपी सिंह की ही जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक महीने कैश बुक और बैंक स्टेटमेंट का मिलान कराये। ऐसे में उनकी भूमिका सवालों के घेरे में है। करोड़ों का खेल होने के बावजूद उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई भी नहीं हुई। इस कारण चीफ इंजीनियर पर भी ऊंगली उठ रही है। बहरहाल इस मामले में पुलिस की आगे की जांच ही सच से पर्दा उठाएगा कि बिजली विभाग में हुए करोड़ों के गोलमाल में कौन-कौन लोग शामिल हैं।