बकाएदारों के खिलाफ जीडीए का सख्त रूख

ओटीएस के तहत 1545 आवेदनों का निस्तारण

गाजियाबाद। एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 31 दिसंबर को समाप्त हो गई है। इस योजना के तहत जीडीए में 31 दिसंबर तक 1745 डिफॉल्टर बकाएदारों ने आवेदन किया। जीडीए द्वारा 1545 आवेदनों का निस्तारण कर दिया हैं। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश ने कहा कि डिफॉल्टर बकाएदारों द्वारा जमा कराए गए कुल 1745 आवेदन के सापेक्ष 1545 आवेदनों का निस्तारण हो जा चुका हैं। शेष आवेदनों का अगले 2 माह में निस्तारण कराया जाएगा। जीडीए में ऑनलाइन और ऑफलाइन जमा किए गए 1745 आवेदन के तहत डिफाल्टर बकाएदार स्कीम में आवेदन जमा किए गए हैं। इनके अलावा बकाएदारों से अब सख्ती से वसूली की जाएगी। 31 दिसंबर तक ओटीएस स्कीम लागू होने के बाद भी जिन डिफाल्टर बकाएदारों द्वारा आवेदन जमा नहीं कराए गए, उनकी पूरी सूची बनाकर कार्रवाई की जाएगी। जीडीए के 8442 आवंटी बकाएदार हैं। इन पर करीब 689 करोड़ रुपए भवन, भूखंड, कॉमर्शियल भूखंडों आदि का बकाया है। शासन द्वारा 6 मार्च को ओटीएस योजना लांच की गई थी। जीडीए के संपत्ति प्रभारी एवं अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने बताया कि इस योजना के लागू होने के बाद जीडीए में 31 दिसंबर तक कुल 1745 आवेदन डिफॉल्टर आवंटियों द्वारा एकमुश्त समाधान योजना के तहत जमा किए गए हैं। इनमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों शामिल हंै। ओटीएस में आवेदन जमा करने के लिए पूर्व में नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। इनमें बकाएदारों ने 111 करोड़ रुपए जमा कराए हंै। इनमें से 245 आवेदन का अगले 2 माह में निस्तारण किया जाएगा। 8442 डिफॉल्टर आवंटियों पर जीडीए का करीब 689 करोड़ रुपए बकाया है। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश ने बताया कि एकमुश्त समाधान योजना के तहत डिफॉल्टर आवंटी बकाया भुगतान एक बार में जमा कर सकते हैं। ऐसा करने पर दंड ब्याज में छूट मिलेगी।