भारत-जापान मेडटेक सहयोग को नई ऊँचाई: यीडा मेडिकल डिवाइसेज पार्क में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित

-जापानी कंपनियों के लिए निवेश अवसरों पर विस्तृत चर्चा, ‘मेड इन इंडिया एंड जापान’ फ्रेमवर्क के तहत सहयोग मजबूत

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के मेडिकल डिवाइसेज पार्क (एमडीपी) में गुरुवार को भारत में जापानी मेडटेक कंपनियों के लिए निवेश के अवसरों पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह (आईएएस) ने की, जबकि सह-अध्यक्षता ओएसडी शैलेंद्र कुमार भाटिया ने संभाली। जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मेडिकल एक्सीलेंस जापान (एमईजे) के सीईओ केनजी शिबुया ने किया। बैठक में यीडा, एमईजे, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर मेडिकल डिवाइसेज (ईपीसीएमडी) के वरिष्ठ अधिकारी तथा पार्क में भूमि आवंटित कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक के दौरान यीडा ने एमडीपी का विस्तारपूर्वक अवलोकन प्रस्तुत किया। यह पार्क भारत के तीन सरकारी अनुमोदित मेडिकल डिवाइस पार्कों में से एक है और 350 एकड़ में फैला हुआ है, जिसका निर्माण 440 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार से 100 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता शामिल है।

पार्क में लगभग 90 प्रतिशत बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है और अब तक 101 कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है। पार्क में रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग, कार्डियो-रेस्पिरेटरी डिवाइसेज, कैंसर केयर एवं रेडियोथेरेपी, इम्प्लांट्स और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है। यीडा ने बताया कि पार्क का उद्देश्य मेडिकल डिवाइस विनिर्माण में भारत को वैश्विक केंद्र बनाना है और इसके माध्यम से रोजगार, नवाचार और तकनीकी क्षमता में सुधार किया जाएगा। बैठक और सहयोग से भारत में मेडिकल डिवाइस विनिर्माण में वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह पार्क न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि भारत को मेडटेक क्षेत्र में आत्मनिर्भर और निर्यात-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जापानी तकनीक और विशेषज्ञता से पार्क में उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार में सुधार की उम्मीद है।

यीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने कहा कि मेडिकल डिवाइसेज पार्क (एमडीपी) भारत में मेडटेक निवेश और उत्पादन के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि यह पार्क विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और निवेशक-अनुकूल प्रोत्साहन प्रदान करता है, जो जापानी और भारतीय कंपनियों के लिए साझेदारी और सहयोग के अवसर खोलता है। उन्होंने कहा कि पार्क में रेडियोलॉजी, कार्डियो-रेस्पिरेटरी डिवाइसेज, कैंसर केयर, इम्प्लांट्स और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्र वैश्विक मांग को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य भारत को मेडटेक उत्पादन का ग्लोबल हब बनाना है। पार्क में अब तक 101 कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है और 90 प्रतिशत बुनियादी ढांचा तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी जापानी प्रतिनिधिमंडल का दौरा जनवरी-फरवरी 2026 में निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूती देगा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि यीडा ने एयरपोर्ट के पास जापानी सिटी विकसित करने की योजना बनाई है, जो औद्योगिक और सांस्कृतिक सहयोग को गहरा करेगी। यह पार्क केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि भारत-जापान औद्योगिक और तकनीकी सहयोग की नई दिशा का प्रतीक है।

निवेशकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं
पार्क नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से मात्र 5 किलोमीटर दूर स्थित है और इसमें विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और निवेशक-अनुकूल प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। यीडा द्वारा प्रदत्त प्रोत्साहनों में पूंजी ब्याज सब्सिडी, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, ईपीएफ एवं रोजगार प्रोत्साहन, कौशल विकास सहायता और 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट शामिल हैं। साथ ही, यीडा ने एयरपोर्ट के निकट 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित करने की योजना भी घोषित की है, जिससे भारत और जापान के औद्योगिक और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। इस सिटी के माध्यम से दोनों देशों की कंपनियों को संयुक्त विनिर्माण, तकनीकी सहयोग और नवाचार के अवसर मिलेंगे।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने दिखाई रुचि
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय कंपनियों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त विनिर्माण और कंपोनेंट विकास सहयोग में गहरी रुचि दिखाई। पार्क की कंपनियों जैसे कृष बायोमेडिकल्स, पॉलीमेड, डेस्को, सायन मेडिकल्स और मेडिसिस ने यीडा की रणनीतिक स्थिति और निवेशक-अनुकूल वातावरण की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने पार्क के पहले पूर्ण इकाई कृष बायोमेडिकल्स के विनिर्माण संयंत्र का दौरा किया और पार्क में मेडिकल डिवाइस उत्पादन की गुणवत्ता और वैश्विक मानकों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरे से दोनों पक्षों के बीच भविष्य में संभावित साझेदारियों और निवेश परियोजनाओं पर चर्चा को गति मिली।

मेड इन इंडिया एंड जापान फ्रेमवर्क
बैठक का समापन दोनों पक्षों की ‘मेड इन इंडिया एंड जापान’ फ्रेमवर्क के तहत सहयोग बढ़ाने की सहमति से हुआ। इस सहयोग के अंतर्गत घरेलू और वैश्विक बाजारों, विशेषकर अफ्रीका और मध्य पूर्व को लक्ष्य बनाया जाएगा। निर्णय लिया गया कि जनवरी-फरवरी 2026 में एमईजे जापानी मेडटेक फर्मों का विशाल प्रतिनिधिमंडल पार्क में लाएगा, जिसमें संभावित साझेदारियों, निवेश और तकनीकी हस्तांतरण पर विस्तृत चर्चा होगी।