टेंशन में पड़ोसी, चीन-पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच मंलवार को टू प्लस टू वार्ता आरंभ हो गई। यह उच्च स्तरीय वार्ता बेहद महत्वपूर्ण है। आक्रामक चीन से निपटने के लिए भी दोनों देश अह्म रणनीति बनाने को उत्सुक हैं। वार्ता में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल प्रतिभाग कर रहे हैं। वार्ता के दौरान कुछ सैन्य समझौते होने की भी उम्मीद है। राजधानी दिल्ली में भारत और अमेरिका के मध्य तीसरी शीर्ष स्तरीय वार्ता शुरू हुई है। इस वार्ता का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संपूर्ण रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और ज्यादा मजबूत करना है। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन निरंतर आर्थिक और सैन्य विस्तार का प्रयास कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले टू प्लस टू वार्ता अह्म मायने रखती हैं। अमेरिका में 3 नवम्बर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की आक्रामकता बढ़ रही है। भारत की जमीन को कब्जाने के लिए ड्रैगन हर पैंतरे का इस्तेमाल कर रहा है। इसके चलते भारत और चीन में तनाव चरम पर है। वह वार्ता के जरिए भारत को उलझाए रखना चाहता है। कोविड-19 (कोरोना वायरस) के कारण भी अमेरिका लगातार चीन को दोष दे रहा है। अमेरिका में अभी भी कोरोना संक्रमण पर काबू नहीं पाया जा सका है। बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ अलग-अलग वार्ता भी की थी। सूत्रों का कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के अलावा दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी भारत के विवाद पर भी संक्षिप्त चर्चा की। भारत-अमेरिका की इस शीर्ष स्तरीय वार्ता पर चीन की पैनी नजर है। वह इस वार्ता को अपने खिलाफ देख रहा है। उधर, इस वार्ता से चीन के अलावा पाकिस्तान की बेचैनी भी बढ़ गई है।















