-एचआईएमटी समूह के शिक्षा विभाग में बी.एड. और डी.एल.एड. के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को दी गई गरिमामयी विदाई
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। एचआईएमटी समूह के शिक्षा विभाग में शनिवार को आयोजित विदाई समारोह स्मरण 2025 न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा का समापन था, बल्कि उनके भावनात्मक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास की एक सजीव झलक भी था। समारोह में उत्साह, उल्लास और आत्मीयता का ऐसा माहौल बना, जिसने हर उपस्थित व्यक्ति को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत रही, जहां मंगलाचरण, गुरु वंदना और सरस्वती स्तुति के मधुर स्वर पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते दिखे। मंच पर एचआईएमटी समूह के चेयरमैन एच.एस. बंसल, सचिव अनिल बंसल, संयुक्त सचिव अनमोल बंसल, समूह निदेशक डॉ. सुधीर कुमार, कार्यकारी निदेशक डॉ. विक्रांत चौधरी और प्राचार्या डॉ. मनोरमा की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा और भी बढ़ा दी। अपने प्रेरक संबोधन में चेयरमैन एच.एस. बंसल ने कहा कि यह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों को आशीर्वाद देने का अवसर है जो शिक्षा के माध्यम से समाज में नई रोशनी फैलाएंगे।
उन्होंने कहा कि एचआईएमटी ने हमेशा न केवल ज्ञान, बल्कि संस्कार देने को प्राथमिकता दी है। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य, समकालीन प्रस्तुतियाँ, हास्य अभिनय और रंग-बिरंगे सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। मंच पर पारंपरिक परिधान परिचालन और रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शन ने समारोह को और भी जीवंत बना दिया। छात्रों का आत्मविश्वास, ऊर्जा और मंचीय गरिमा यह दर्शा रही थी कि वे भावी समाज निर्माता बनने को तत्पर हैं। समारोह के अंत में विद्यार्थियों को विशेष उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिन्होंने न केवल उनके गुणों को सम्मानित किया, बल्कि उनके पूरे व्यक्तित्व को अभिव्यक्त किया। डी.एल.एड. के अजीत और निकिता को “श्री विदाई” और “श्रीमती विदाई” का सम्मान मिला, वहीं बी.एड. के अविनाश और प्रीति को “ऊर्जा पुरुष” और “गरिमा गौरव” की उपाधियाँ प्रदान की गईं।
प्राचार्या डॉ. मनोरमा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सेवा, संवेदना और आत्मबल से परिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज के शिक्षार्थी ही कल के विचारशील शिक्षक और समाज सुधारक बनते हैं। समारोह का समापन विदाई के भावनात्मक क्षणों के साथ हुआ, जहां विद्यार्थियों की आँखों में बीते वर्षों की स्मृतियाँ थीं और मन में भविष्य की असीम संभावनाएँ। स्मरण 2025 एक ऐसा पल बन गया, जो शिक्षा, संबंध और संस्कारों की विरासत के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।

















