उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कैमकुस नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में नशा छोड़ चुके लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल के तहत शनिवार को वोकेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। भागीरथ सेवा संस्थान द्वारा संचालित इस केंद्र में लाभार्थियों को हस्तकला और कुटीर उद्योगों से जोड़कर स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। संस्थान के अनुभवी ट्रेनर आशीष कुमार मौर्य ने केंद्र में भर्ती लाभार्थियों को हैंड-वॉश और फिनायल बनाने की व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। इस प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को केवल निर्माण की प्रक्रिया ही नहीं सिखाई गई, बल्कि उन्हें सावधानियों, कच्चे माल की खरीद, लागत निर्धारण, पैकेजिंग, बिक्री प्रक्रिया और इससे होने वाले संभावित लाभ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का उद्देश्य लाभार्थियों को स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाना रहा। इस प्रकार की पहल न केवल आर्थिक रूप से उन्हें सशक्त बनाती है, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें मजबूती प्रदान करती है, जिससे पुनर्वास की प्रक्रिया को और प्रभावशाली बनाया जा सके। भागीरथ सेवा संस्थान के निदेशक अमिताभ स्कूल ने बताया कि संस्थान द्वारा स्थापित स्व. कमला सुकुल मेमोरियल कुटीर उद्योग के अंतर्गत इस तरह की ट्रेनिंग सभी उपक्रमों में नियमित रूप से कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि पुनर्वास की सफलता का आधार केवल नशा मुक्ति नहीं, बल्कि रोजगार से जुड़ाव है। यही वजह है कि संस्थान लाभार्थियों को हुनर सिखाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उन लोगों के लिए आशा की एक किरण बनकर सामने आया है, जिन्होंने अपने अतीत से लड़कर एक नई शुरुआत की है। नशामुक्ति के बाद जब उन्हें नए जीवन की राह दिखाई जाती है, तो यह न केवल उनके जीवन को बदलता है, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा देता है।
















