कांवड़ यात्रा के लिए निगम की तत्परता पर महापौर की नजर

-नंगे पैर शिवभक्तों को न चुभे एक भी कंकर: सुनीता दयाल
-नगर निगम की तैयारियों का किया स्थलीय निरीक्षण, शिविर संचालकों से ग्रीन बेल्ट और प्लास्टिक मुक्त यात्रा की अपील

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। श्रावण मास में हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए लौटते भोलेनाथ के भक्तों की सेवा और सुरक्षा को लेकर गाजियाबाद नगर निगम पूरी मुस्तैदी से जुटा है। यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं का जायजा लेने महापौर सुनीता दयाल खुद मैदान में उतरीं और नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न कांवड़ शिविरों, मार्गों और सार्वजनिक स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नगर निगम द्वारा की गई तैयारियों जैसे शिविरों के आसपास साफ-सफाई, जलापूर्ति के टैंकर, अस्थायी शौचालयों की उपलब्धता, प्रकाश व्यवस्था और 24 घंटे कार्यरत सफाई कर्मचारियों की स्थिति का गहराई से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान महापौर ने वहां मौजूद सफाई कर्मचारियों से संवाद करते हुए कहा कि यह कोई साधारण यात्रा नहीं, बल्कि आस्था का महासंगम है। शिवभक्त नंगे पैर यात्रा करते हैं, ऐसे में यदि सड़कों पर कोई कंकर या अवरोध हुआ, तो यह हमारी व्यवस्थाओं की विफलता होगी। उन्होंने विशेष रूप से सफाईकर्मियों को यह निर्देश दिया कि पूरे मार्ग को निरंतर साफ रखा जाए, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा निर्बाध और सुगम बनी रहे।

महापौर ने निरीक्षण के दौरान मेरठ रोड पर स्थित ग्रीन बेल्ट का भी दौरा किया, जहां कुछ शिविर संचालकों द्वारा पौधों को नुकसान पहुंचाने की शिकायत मिली थी। उन्होंने इस पर नाराज़गी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर की सुंदरता और पर्यावरण की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है। शिविर लगाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए पेड़ों और पौधों को नुकसान पहुंचाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। महापौर ने सभी शिविर संचालकों से अनुरोध किया कि वे ग्रीन बेल्ट में पौधों की रक्षा करें और सार्वजनिक स्थानों पर सजगता और मर्यादा बनाए रखें। महापौर ने निरीक्षण के अंत में सभी कांवड़ शिविरों के संचालकों से प्लास्टिक मुक्त शिविर संचालन की अपील भी की।

उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाना हम सभी का दायित्व है। कृपया अपने शिविरों में प्लास्टिक का प्रयोग न करें, यह हमारे शहर की छवि और धरती के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा। नगर निगम की तैयारियों और महापौर की सक्रियता यह दर्शाती है कि गाजियाबाद प्रशासन कांवड़ यात्रा को केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सामूहिक श्रद्धा, सेवा और समर्पण का उत्सव मान रहा है। महापौर की निगरानी और प्रेरणादायक संवाद से न केवल अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह आया, बल्कि समाज के सभी वर्गों को यात्रा को स्वच्छ, सुरक्षित और सुसंस्कृत बनाने का प्रेरणादायी संदेश भी मिला।