महाराजा अग्रसेन जयंती पर इंदिरापुरम में निकलेगी वैश्य समाज की तीसरी भव्य शोभायात्रा

-मा काली का अखाड़ा पहली बार बनेगा आकर्षण, 101 महिलाओं की कलश यात्रा और वीरांगनाओं की झांकी से सजेगी शोभायात्रा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। इंदिरापुरम में 21 सितंबर का दिन इतिहास रचने वाला साबित होगा। इस दिन वैश्य अग्रवाल परिवार अपनी तीसरी भव्य महाराजा अग्रसेन शोभायात्रा का आयोजन करने जा रहा है। इंदिरापुरम का सबसे बड़ा और सक्रिय संगठन माने जाने वाले इस परिवार की शोभायात्रा इस बार विशेष आकर्षणों से परिपूर्ण होगी। समाज के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक इस यात्रा को देखने के लिए जुटेंगे। शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण इस बार मा काली का अखाड़ा होगा, जो पहली बार इस आयोजन का हिस्सा बनेगा। अखाड़े के युवाओं का जोश, उनकी पारंपरिक कलाएं और व्यायाम कला समाज में नई ऊर्जा का संचार करेंगी। इसके साथ ही 101 महिलाओं की सजीव और भव्य कलश यात्रा आस्था और मातृशक्ति की अद्भुत झलक प्रस्तुत करेगी। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर कलश धारण करेंगी और शोभायात्रा को दिव्यता और भक्ति से भर देंगी।

महाराजा अग्रसेन के पराक्रम और शौर्य की याद दिलाने के लिए 18 राजकुमार घोड़ों पर सवार होकर शोभायात्रा का हिस्सा बनेंगे। तीन वीरांगनाओं की झांकी महिला शक्ति और साहस का सजीव प्रतीक बनेगी। इनके साथ अन्य धार्मिक झांकियां, भजन मंडलियां, ढोल-नगाड़ों की गूंज और पुष्प वर्षा से इंदिरापुरम की सड़कों पर एक अद्भुत वातावरण तैयार होगा। पूरा क्षेत्र भक्तिमय और उत्सवमय रंगों में रंगा नजर आएगा। इस भव्य आयोजन में समिति द्वारा शनिवार को सांसद अतुल गर्ग को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। उन्होंने समाज को जोडऩे वाले इस कार्यक्रम को बेहद सराहनीय बताया और अपनी उपस्थिति की सहमति भी दी। सांसद अतुल गर्ग ने कहा कि समाज को एक सूत्र में बांधने और आने वाली पीढिय़ों को संस्कार देने से बड़ा कार्य कोई और नहीं हो सकता। इस अवसर पर वैश्य अग्रवाल परिवार के प्रधान मुकेश गुप्ता, पार्षद प्रीति जैन, सचिव हेमंत गुप्ता, यात्रा संयोजक प्रशांत अग्रवाल और प्रदीप गुप्ता (मामा जी) सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे और उन्होंने आयोजन की तैयारियों की जानकारी दी। केवल शोभायात्रा ही नहीं, वैश्य अग्रवाल परिवार ने समाज की मजबूती के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है।

परिवार ने इंदिरापुरम में अपने भवन के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी है। भवन निर्माण से पहले धार्मिक परंपरा के अनुसार पूरे समाज ने खाटू श्याम जी के दरबार में जाकर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर 121 लोग विशेष रूप से तीन बसों में सवार होकर खाटू श्याम जी धाम पहुंचे और वहां भव्य पूजा के बाद आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद ट्रस्ट के प्रधान सरवन गर्ग के नेतृत्व में इंदिरापुरम में भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया। ट्रस्ट के प्रधान सरवन गर्ग ने भवन निर्माण को समाज की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह भवन केवल एक ढांचा नहीं होगा, बल्कि समाज की भावनाओं, संस्कृति और एकता का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यहां धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक कार्यों का संचालन होगा।

यह भवन हमारी आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणादायी धरोहर बनेगा। पूरी शोभायात्रा का माहौल समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जगह-जगह पर शोभायात्रा का स्वागत पुष्पवृष्टि और जलपान से होगा। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवक सभी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर समाज की एकता और श्रद्धा का प्रतीक बनेंगे। भजन-कीर्तन और जयघोषों से वातावरण गूंजेगा और इंदिरापुरम की सड़कों पर एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिलेगा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोडऩे, संस्कारों को सहेजने और एकता के संदेश को फैलाने का अनुपम प्रयास है। वैश्य अग्रवाल परिवार का यह कदम गाजियाबाद के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिखने वाला साबित होगा।

शोभायात्रा से जुड़े मुख्य आकर्षण
• धार्मिक झांकियां – पौराणिक कथाओं और देवी-देवताओं से संबंधित भव्य झलकियां।
• भक्ति संगीत और भजन मंडलियां – ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और भजन कीर्तन से गुंजेगा इंदिरापुरम।
• सामूहिक सहभागिता – हर आयु वर्ग के लोग पारंपरिक परिधानों में शामिल होंगे।
• सामाजिक संदेश – एकता, महिला सशक्तिकरण और संस्कारों के महत्व पर आधारित संदेश।

इंदिरापुरम बनेगा उत्सव का केंद्र
21 सितंबर को इंदिरापुरम की सड़कों पर भक्तिमय वातावरण होगा। सैकड़ों महिलाएं, युवक, बुजुर्ग और बच्चे इस शोभायात्रा का हिस्सा बनेंगे। जगह-जगह पर शोभायात्रा का स्वागत पुष्पवृष्टि और जलपान से किया जाएगा।

समाज एक सूत्र में बंधेगा
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि समाज को एकता, संस्कार और भाईचारे के सूत्र में पिरोने का अद्वितीय प्रयास भी साबित होगा। वैश्य अग्रवाल परिवार का यह कदम निश्चित ही गाजियाबाद की सामाजिक-सांस्कृतिक धरोहर में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा।