-जल शक्ति अभियान: आई एम इम्प्रेसड बाई यॉर वर्क
-जल संरक्षण के लिए योजना पर कार्य व जनजागरूता पर दें विशेष ध्यान: अभिनव गोपाल
-बैठक के उपरान्त किया योजनाओं के तहत किए गए कार्यों का स्थलीय निरीक्षण
गाजियाबाद। जल शक्ति अभियान (कैच द रैन-2024) के अंतर्गत मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं केंद्रीय नोडल अधिकारी धर्मेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में संयुक्त सचिव धर्मेंद्र कुमार सिंह ने जल संरक्षण को लेकर चल रही योजनाओं एवं कार्यों की उन्नति के बारे में विस्तार से अवगत हुए। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने बैठक का संचालन किया। उन्होंने अवगत कराया कि जनपद में जल संरक्षण को लेकर केंद्र एवं प्रदेश सरकार की संचालित योजनाओं पर कार्य प्रगति पर चल रहा हैं। जन चौपालों, गोष्ठी, जल के संबंध में जन जागरूकता रैली,स्कूलों-कॉलेजों में चित्रकला,वाद विवाद,जल संरक्षण पर निबंध सहित अन्य के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक किया जा रहा है। नोडल अधिकारी ने विभागीय अधिकारियों से जल संरक्षण से संबंधित सवाल किए।
जिला पंचायत राज अधिकारी प्रदीप द्विवेदी ने बताया कि विभाग द्वारा वाटर रिसाइकिल, वाटर ट्रीटमेंट, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए जल संरक्षित किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बने तालाबों में दूषित जल ना जाए, इसके लिए उचित प्रबंध किए जा रहे हैं। लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरिओम ने लघु सिंचाई खंड एवं नोडल अधिकारी भूगर्भ जल द्वारा अवगत कराया कि जनपद में औद्योगिक क्षेत्र का बहुत तेजी के साथ विस्तार हुआ। जिससे बोरवेल द्वारा भूजल दोहन हुआ है। इसकी पूर्ति एवं भूजल रिचार्ज करने के लिए जनपद में अनेक क्षेत्र में फर्मों के माध्यम से तालाब खुदवाए जा रहे हैं। जिससे की भूगर्भ जल रिचार्ज हो सके। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना व सीलिंग की कार्रवाई भी की जा रही है। जल संरक्षण अभियान व गोष्ठियां की जा रही है। उपनिदेशक कृषि रामजतन मिश्र ने बताया कि किसानों द्वारा डीजल पंप से पहले भूमि के लिए भूजल दोहन किया जाता था,लेकिन अब सोलर पंप द्वारा किया जाता है। इससे भूजल का दोहन कम होता है और भूजल का सही इस्तेमाल हो जाता है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता भारत भूषण ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत जनपद के 147 ग्राम चिन्हित हें। जिसमें से 128 ग्रामों की डीपीआर स्वीकृत हो चुकी है। इसके साथ ही कुल 51 ग्रामों में योजना का सीधे ट्यूबवेल व टैंक के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। जिला उद्यान अधिकारी निधि ने बताया कि जनपद के लगभग 1000 हेक्टेयर से अधिक भूमि में ड्रिप और स्प्रिंकलर पद्धति से सिंचाई की जा रही है, जिससे जल बहुत कम वेस्ट होता है और पौधों को पूर्ण मात्रा में जल भी मिल जाता है। जल की कम खपत होती है और जल संरक्षण होता है।
उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. सलोनी ने मियावाकी पद्धति से पौधे लगाने की विधि को विस्तार से बताया। इस पद्धति में प्रति हेक्टेयर 35 हजार पौधे लगाए जाते है। जिनमें हर्ब,झाडिय़ा और पेड़ होते हैं, जो बहुत कम समय में प्राकृतिक जंगल का रूप ले लेते हैं। जिससे जल संरक्षण करने में काफी मदद मिलती है। संयुक्त सचिव धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पहली बैठक अच्छी रही है। डीएम और सीडीओ के नेतृत्व में और अच्छा कार्य करेंगे।
जल हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जल ही जीवन है, जल संरक्षण करना हमारी अहम जिम्मेदारी है। इस मौके पर वैज्ञानिक सेंट्रल ग्राउंड वाटर शेख मोहम्मद हुसैन ने जल संरक्षण को लेकर अनेक जानकारियां ली। इसके बाद सभी अधिकारियों ने तालाबों सहित अन्य भूगर्भ जल संरक्षण सम्बंधित योजनाओं पर हुए कार्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान जिला विकास अधिकारी प्रज्ञा श्रीवास्तव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव, खंड विकास अधिकारी सुधीर कुमार, विकास यादव,आंचल पांडेय अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत पतला आदि अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जल ‘शक्ति अभियान के तहत वर्षा जल संचयन से संबंधित नोडल अधिकारी द्वारा समीक्षा की गई।ग्राम भटजन, पलौता विकास खंड भोजपुर में अमृत सरोवर का निरीक्षण किया।
वहां पर पौधारोपण भी किया। किसान विजयपाल पुत्र नंद किशोर मजरा पलौता, ग्राम पंचायत-भटजन पलौता के खेत में स्थापित ड्रिप इरीगेशन का निरीक्षण किया। भटजन पनौता गांव में पंचायत भवन पर ग्रामीणों के साथ साथ भूजल संरक्षण के संबंध में चर्चा की गई। भोजपुर विकास खंड कार्यालय में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निरीक्षण किया गया। भोजपुर में जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्मित पाइप पेयजल योजना एवं गांव में पेयजल योजना के लाभार्थी अरुण कुमार पुत्र ओमवीर सिंह के आवास में दिए गए कनेक्शन का निरीक्षण भी किया।


















