विवादित इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई, नगर आयुक्त ने किया रिलीव

नगर निगम के लाइट विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर की तैनाती को शासन ने बताया था अवैध

गाजियाबाद। नगर निगम के प्रकाश विभाग से अवर अभियंता गजेंद्र पाल शर्मा को एकाएक चलता कर दिया गया है। इस बावत शासन को भी रिपोर्ट भेज दी गई है। चर्चा है कि नगर विकास मंत्री के सख्त रूख के बाद जेई गजेंद्र पाल को हटाया गया है। बता दें कि गजेंद्र पाल शर्मा हापुड़-पिलखुआ विकास प्राधिकरण में तैनाती के समय मेरठ के अपर आयुक्त के जरिए प्राधिकरण के साथ-साथ निगम के प्रकाश विभाग में भी सेवाएं देने से संबंधित आदेश कराने में कामयाब रहे थे। पिछले करीब ढाई साल से वह नगर निगम में तैनात रहे। इस अवधि में वह विवादों एवं चर्चाओं में रहे। गजेंद्र पाल शर्मा पर इस बीच नगर निगम में लीक से हटकर सगे संबंधियों की फर्मों से लाइटें आदि मार्केट से कई गुणा महंगे रेट पर खरीदने के न सिर्फ आरोप लगे बल्कि मामला लोकायुक्त तक पहुंचा। लोकायुक्त के आदेश पर प्रशासन द्वारा गजेंद्र पाल शर्मा के कार्यकाल से जुड़े मामलों की फाइलों की जांच कराई जा रही है। हाल में जब गजेंद्र शर्मा द्वारा नगर निगम के प्रकाश विभाग में सेवाएं देने का मामला उठा तो शासन द्वारा उनकी तैनाती को अवैध करार देते हुए मूल विभाग में भेजे जाने के आदेश दिए गए थे। अपने रसूख के बल पर गजेंद्र पाल शर्मा शासन के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे थे। सूत्र बताते हैं कि प्रकरण जब नगर विकास मंत्री के सामने पहुंचा तो उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की। नगर विकास मंत्री के कड़े रूख के बाद आनन-फानन में गजेंद्र पाल शर्मा को रिलीव कर दिया गया। उधर, बताते हंै कि जलकल विभाग के सहायक अभियंता योगेंद्र यादव के प्रमोशन के बाद शासन द्वारा यादव एवं जेई ओमप्रकाश के तबादला आदेश जारी किए गए थे। इन दोनों अभियंताओं को भी रिलीव नहीं किया गया है। बताते हैं कि जलकल विभाग में अधिशासी अभियंता का कोई पद ही नहीं है।