पुलिस विभाग की तर्ज पर वायरलेस पर सुनाई देगी कमांडर और कोबरा की आवाज
गाजियाबाद। शहर में व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए नगर निगम नई पहल करने जा रहा है। पुलिस विभाग की तर्ज पर अब वायरलेस सेट प्रणाली को अपनाया जाएगा। ऐसे में नगरायुक्त का कोड नेम कमांडर रहेगा। वायरलेस सेट पर कमांडर शब्द फ्लैश होने का मतलब नगरायुक्त से होगा। इसके अलावा सफाईनायक का कोड नेम कोबरा रहेगा। किसी सफाईनायक को दिशा-निर्देश देने से पहले कोबरा शब्द का प्रयोग किया जाएगा। शहर में व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए नगर निगम ने पुलिस विभाग की तरह वायरलेस सेट प्रणाली को अपनाने का निर्णय लिया है। दरअसल वायरलेस सेट प्रणाली की अपनी अलग शब्दावली होती है।
इसके अंतर्गत नगरायुक्त कमांडर और सफाईनायक कोबरा बनाए जाएंगे। नगर निगम ने इस प्रणाली को लागू करने पर काम शुरू कर दिया है। नगरायुक्त तंवर का कहना है कि इस प्रणाली से व्यवस्थाएं दुरूस्त रखी जाएगी। वॉकी टॉकी के जरिए सफाई कर्मचारियों को भी हर वक्त दुरूस्त रखा जा सकेगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार इंदौर के दौरे पर गए थे। इंदौर स्मार्ट सिटी है और स्वच्छता के मामले में पूरे देश में नंबर-1 है। उनके मुताबिक इंदौर की सफलता के पीछे वहां की मैकेनाइज्ड व्यवस्था के साथ ही वायरलेस सेट कंट्रोल रूम भी है, जिसकी बदौलत अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संवाद अच्छा होता है। इस कारण समन्वय भी मजबूत होता है।

अधिकारियों का मानना है कि इसी व्यवस्था की वजह से पुलिस बाकी विभागों से कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी तरीके से कार्य कर पा रही है। इसलिए अब गाजियाबाद नगर निगम भी नगरायुक्त से लेकर सभी विभागाध्यक्ष, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता और सफाईनायक तक के कर्मियों को वायरलेस सेट देगा। नगर निगम में इसका कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। शहर में किसी स्थान पर कूड़ा-करकट न उठने पर अधिकारी फिलहाल संबंधित विभागाध्यक्ष को फोन करते हैं या नगर निगम के व्हाट्स-अप गु्रप पर फोटो अपलोड करते हैं। कई बार अधिकारी मातहत का फोन नहीं उठाते या फोन न उठा पाने और व्हाट्स-अप मैसेज न देख पाने का बहाना बना देते हैं।
वायरलेस प्रणाली लागू होने पर संबंधित अधिकारी को तत्काल जवाब देना होगा। अभी तक अधिकारी संबंधित को व्यक्तिगत रूप से ही बता पाते थे, मगर अब वायरलेस सेट पर ही बाकी सबको सुनाकर लापरवाही बरतने वाले की क्लास लगाई जाएगी। हाल ही में एक ऑडिट में निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं मिले थे। इसे लेकर अधिकारियों का दावा है कि इस प्रणाली से निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ेगी और गुणवत्ता भी सुधरेगी। वायरलेस प्रणाली लागू होने पर संबंधित अधिकारी को जवाब देना ही होगा।
















