गाजियाबाद। मानसून के मौसम के मद्देनजर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने जर्जर भवनों के प्रति गंभीरता दिखाई है। इन भवनों को चिन्हित करने का काम आरंभ कर दिया गया है। सभी 8 जोन में यह काम शुरू किया गया है। मानसून के मौसम में जर्जर भवनों में हादसे होने का खतरा रहता है। इसे ध्यान में रखकर जीडीए ने यह मुहिम आरंभ की है। इन भवनों में शरण लिए नागरिकों को सचेत किया जा रहा है। जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश के आदेश पर यह कार्रवाई प्रारंभ हुई है।
शहर में प्रताप विहार, विजय नगर, तुलसी निकेतन, संजय नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में जर्जर भवनों को चिन्हित करने का जिम्मा प्रवर्तन जोन के इंजीनियरों को सौंपा गया है। उपाध्यक्ष कृष्णा करूणेश के मुताबिक जीडीए की सभी कॉलोनियों में जर्जर भवनों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। जोनवार किस जोन क्षेत्र में जर्जर मकान हैं, इसकी पूरी सूची तैयार कराई जाएगी। 3 साल पहले 22 जुलाई को आकाश नगर में बिल्डर द्वारा तैयार इमारत जमींदोज होने के बाद 8 नागरिकों की मौत हो गई थी। ऐसी घटना न हो, इसलिए जीडीए द्वारा सभी जोन में जर्जर भवनों को चिन्हित करने हेतु सर्वे कराया जा रहा है। नए नोडल अधिकारी (प्रवर्तन) अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने सभी 8 जोन के प्रवर्तन प्रभारियों के साथ सहायक अभियंता और अवर अभियंताओं के साथ बैठक कर दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसी भी सूरत में जीडीए क्षेत्र में अवैध निर्माण न होने देने पर जोर दिया है।
जीडीए उपाध्यक्ष की अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस की नीति से प्रवर्तन अनुभाग के अवर अभियंताओं में हड़कंप मचा है। जीडीए अपर सचिव व नोडल अधिकारी प्रवर्तन सीपी त्रिपाठी ने बताया कि सभी अवर अभियंताओं से उनकी डायरी तलब की गई है। डायरी में अवैध निर्माण व उसके खिलाफ कब-कब क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी दर्ज कराई जाएगी। डायरी मिलने के बाद अलग-अलग क्षेत्र में औचक निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान डायरी में दर्ज अवैध निर्माण के अलावा कहीं और अवैध निर्माण होता मिला या पूर्व में रूकवाया गया अवैध निर्माण दोबारा से होता मिला, तो संबंधित क्षेत्र के अवर अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी कर इसकी जीडीए उपाध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
















