तंबाकू उत्पाद लाइसेंस अनिवार्यता के नाम पर दुकानदारों का उत्पीडऩ बर्दाश्त नहीं: प्रदीप गुप्ता

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तंबाकू बेचने पर लाइसेंस की अनिवार्यता का व्यापारी एकता समिति संस्थान ने विरोध किया है। शनिवार को समिति मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र जारी करते हुए छोटे व्यापारियों को राहत देने की मांग की। राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा पूरे यूपी में 40 से 50 लाख दुकानदारों की मुश्किल बढ़ जाएगी। लाइसेंस प्रणाली लागू होने से निम्न विक्रेता इसका शुल्क कैसे उठा पाएगा। लाइसेंस प्रणाली लागू होने से निरक्षर व गरीब विक्रेताओं का शोषण होगा। प्रदेश में पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू बेचने वाले छोटे-छोटे पनवाड़ी, छोटे-छोटे किराना स्टोर के मालिक तथा छोटे दुकानदार जो बिस्कुट और टॉफी भी बेचते हैं, वह भी रखते हैं। अगर इन चीजों के लिए लाइसेंस लेना आवश्यक रूप से जरूरी कर दिया जाएगा और उसकी भी एक भारी फीस रखी जाएगी तो यह इन छोटे-छोटे दुकानदारों के साथ अन्याय होगा। कोरोना महामारी के कारण प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है और उस पर इस तरह का कानून लाना तर्कसंगत नहीं है। इस कानून के चलते छोटे-छोटे दुकानदार उत्पीडऩ के शिकार होंगे, उनका शोषण होगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। अगर वह टॉफी ,बिस्कुट बेचेंगे तो सरकार के कानून के अनुसार, पान मसाला, तंबाकू तथा सिगरेट आदि नहीं बेच पाएंगे तो परिवार की जीविका कैसे चलाएंगे। इस कानून से सिर्फ बड़े दुकानदारों का ही फायदा होगा, जो गलत है। उन्होने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा प्रदेश में गरीब एवं निचले वर्ग के लोगों के लिए भाजपा सरकार हितैषी है। अगर मार्किट में डुप्लीकेट सामान बिक रहा है तो उसके लिए शराब की तरफ एक्साइज डिपार्टमेंट बनाकर चेकिंग अभियान चलाया जाए। सरकार चाहे तो तंबाकू पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर अच्छा संदेश दे सकती है लेकिन लाइसेंस के नाम पर छोटे दुकानदारों का उत्पीडऩ बर्दाश्त नहीं होगा।