नोटिस के बावजूद प्रतिष्ठान संचालकों पर नहीं पड़ा कोई असर
गाजियाबाद। शहर में बगैर लाइसेंस संचालित निजी प्रतिष्ठानों पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा। इन प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम कड़ा रूख अपना रहा है। नोटिस जारी होने के बावजूद संबंधित संस्थानों ने लाइसेंस लेना जरूरी नहीं समझा है। अब विभागीय स्तर से कार्यवाही करने की तैयारी आरंभ कर दी गई है। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर के आदेश पर नगर निगम ने संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्यवाही की रूपरेखा तैयार कर ली है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि नगर निगम सीमांतर्गत संचालित अनुज्ञप्ति बाइलॉज के अंतर्गत जारी होने वाले लाइसेंस जैसे कि देसी शराब, विदेशी शराब, मॉडल शॉप, बियर शॉप, बार होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, ईटिंग हाउस, क्लीनिक, आयुर्वेदिक क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, नर्सिंग होम, हॉस्पिटल, पैथोलॉजी, डायग्नोस्टिक सेंटर, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड यूनानी क्लिनिक, होम्योपैथिक क्लिनिक, ब्लड बैंक, कोल्ड ड्रिंक आइसक्रीम इत्यादि प्रतिष्ठानों के संचालकों को लाइसेंस लेना अनिवार्य है। वह अपने व्यवसाय से संबंधित लाइसेंस वर्ष 2022-23 के लिए संबंधित जोन में आवेदन कर लाइसेंस शुल्क जमा कर लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं।
अगर समयानुसार लाइसेंस नहीं लिया गया तो सीलिंग की कार्रवाई भी की जाएगी। लाइसेंस न लेने पर संबंधित व्यवसायी के विरूद्ध उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धाराओं के अंतर्गत सीलिंग एवं अन्य विधिक कार्यवाही भी की जाएगी। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी का कहना है कि सीलिंग कार्यवाही से बचने के लिए व्यवसायी नियमानुसार लाइसेंस अवश्य प्राप्त कर लें। उन्होंने बताया कि गणमान्य नागरिकों तथा पार्षदों के सहयोग से भी सभी प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की गई है की संबंधित जोन में जाकर वह जोनल प्रभारियों से संपर्क कर चालू वित्त वर्ष के लिए लाइसेंस प्राप्त कर लें।
















