गाजियाबाद। नगर निगम का कर्मचारी काम के दौरान हादसे का शिकार हो गया। हादसे में कर्मचारी की ना सिर्फ एक अंगुली कट गई बल्कि पेट भी फट गया। बेटे की जान आफत में आने की जानकारी मिलने पर पिता मदद के लिए दौड़ पड़े। बेटे को एक से दूसरे अस्पताल में लेकर वह पहुंचे, मगर विभाग के किसी अधिकारी या सीएलसी ठेकेदार ने पीडि़त की सुध लेना तक जरूरी नहीं समझा है। ऐसे में व्यथित पिता की पीड़ा को आसानी से समझा जा सकता है। उन्होंने नगर निगम और ठेकेदार पर सवाल उठाकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
रिंकू कुमार पुत्र करम वीर सिंह सीएलसी के जरिए ठेके पर नगर निगम में काम करता है। वह पेशे से कारपेंटर हैं। जानकारी के अनुसार रिंकू 30 मई को अपर नगरायुक्त अरूण कुमार यादव के लोहिया नगर आवास पर काम कर रहा था। इस दौरान वह हादसे का शिकार हो गया। हादसे के दौरान एक रिंकू की एक अंगुली कट गई। पेट भी फट गया। गनीमत रही कि जान बच गई। पेट के निचले हिस्से में यदि ब्लेड घुस जाता तो उसकी जान पर बन आती। बेटे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी मिलने पर पिता करम वीर सिंह मौके पर पहुंचे।
उन्होंने बेटे को आनन-फानन में नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया। बेटे की जान बचाने को पिता एक से दूसरे अस्पताल में दौड़ते रहे। उनकी पीड़ा यह है कि नगर निगम कि किसी अफसर या ठेकेदार ने उनके बेटे की सुध तक नहीं ली है। आरोप है कि सीएलसी के जरिए ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। सभी कर्मचारी ईएसआई की सुविधा से वंचित हैं। हालांकि फंड की एवज में वेतन से कटौती कर ली जाती है। बदले में कर्मियों को जरूरत के समय कोई सुविधा नहीं मिल पाती।
















