सेवानिवृत्त कर्मियों का अधिकार है पेंशन: लक्ष्मी मिश्रा

यूपी पेंशनर्स एसोसिएशन ने बैठक में रखी 11 सूत्रीय मांग

गाजियाबाद। देश की आजादी के बाद जो कर्मचारी और पदाधिकारी सेवानिवृत्त होते थे, उन्हें कई वर्षों तक पेंशन का भुगतान नहीं होता था। यह परम्परा प्राय: देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र सरकार के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लागू था। देश के पीडि़त पेंशनरों का मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 17 दिसम्बर, 1982 को यह फैसला दिया गया कि पेंशनरों को ससमय पेंशन भुगतान सभी सरकारें सुनिश्चित करें। न्यायालय ने यह भी कहा कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मियों का अधिकार है। यह बातें गुरूवार को कलक्ट्रेट  सभागार में पेंशनर्स दिवस पर मुख्य कोषाधिकारी लक्ष्मी मिश्रा ने कही। उन्होंने सभी विभागों के पेशन संबंधी कार्यों की समीक्षा भी की। इनमें पेशन संबंधी शिकायतों के साथ उनके निस्तारण की स्थिति के बारे सभी विभागों द्वारा प्रगति आख्या प्रस्तुत की गई। इस दौरान यूपी पेंशनर्स एसोसिएशन ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखी। एसोसिएशन ने सातवें वेतनमान के बराबर पेंशन देने के साथ उनके लिए एक पेंशन कक्ष उपलब्ध कराने की मांग की। बैठक में प्रशासन के अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, जीडीए, आरटीओ, पुलिस, ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रमुख रूप से पिछले एक दशक में सेवानिवृत्त हुए सरकारी कर्मचारियों के पेंशन वितरण के बारे में जानकारी ली गई। मुख्य कोषाधिकारी लक्ष्मी मिश्रा ने कहा कि किसी विभाग में पेंशन संबंधी कोई भी समस्या लंबित नहीं होनी चाहिए। पेंशनकर्मियों को विभाग में एक निश्चित अवधि के अंदर पेशन संबंधी समस्याओं का निस्तारण होना चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार के साथ प्रदेश सरकार पूरी तरह से कटिबद्ध है। जिलाधिकारी डा. अजय शंकर पांडेय के निर्देश पर सभी प्रकार की समस्यायाओं को दिसंबर के अंत तक निस्तारण करने का आदेश दिया गया। बैठक में यूपी पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जेके जैन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को मुख्य लेखाधिकारी के सामने रखा। एसोसिएशन का कहना है कि उन्हें ऑनलाइन जीवन प्रमाण पत्र देने की सुविधा दी गई है। इसके बावजूद अधिकांश बुजुर्ग विकलांग,बीमार और अक्षम है। ऐसे लोगों को जीवन प्रमाण पत्र देने में छूट होनी चाहिए। इसके अलावा पेशनकर्मियों चिकित्साप्रतिपूर्ति भत्तें के निस्तारण में अनावश्यक विलंब किया जाता है। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।