विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर सेमिनार एवं वृक्षारोपण

-तंबाकू न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा: नेहा रूंगटा
-नशामुक्त भारत अभियान से लोगों में बढ़ी जागरूकता: अमिताभ सुकुल

गाजियाबाद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं भागीरथ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में मुरादनगर स्थित कैमकुस नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसका विषय था तम्बाकू से तौबा और पर्यावरण सुरक्षा। सेमिनार की मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती नेहा रूंगटा थी। सेमिनार में पुनर्वास केंद्र के संवासियों, स्थानीय लोगों एवं कैमकुस लॉ कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। डब्ल्यूएचओ द्वारा विश्व तंबाकू निषेध दिवस की इस वर्ष की थीम पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेमिनार में न सिर्फ इस विषय पर गंभीर चर्चा की गई बल्कि कैमकुस कॉलेज ऑफ लॉ के छात्र-छात्राओं एवं फैकल्टी द्वारा वृक्षारोपण कर समाज को एक संदेश दिया गया।

सेमिनार के दौरान एक्सपर्ट्स द्वारा तंबाकू से व्यक्ति मे होने वाले शारीरिक-मानसिक नुकसान, अन्य प्रकार के नशे की लत में तंबाकू के योगदान एवं इसके आर्थिक-सामाजिक दुष्प्रभाव पर रोशनी डाली गई। मुख्य अतिथि न्यायाधीश नेहा रूंगटा ने तम्बाकू इस्तेमाल की हानियों पर चर्चा करते हुए बताया कि धूम्रपान करने से करने वाले की अपेक्षा उन लोगों पर ज़्यादा बुरा प्रभाव उन लोगों पर पड़ता है जो नशा सेवन करने वाले व्यक्ति के आसपास रहते हैं। उन्होंने पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव को एक उदाहरण के द्वारा समझाते हुए बताया कि समुद्र के किनारे इकठ्ठा होने वाले कूड़े में एक बड़ा हिस्सा सिगरेट की बड होती है, जो सिगरेट पीने के बाद लोग बीच पर छोड़ कर चले जाते हैं।

भागीरथ सेवा संस्थान के निदेशक अमिताभ सुकुल ने कहा कि तंबाकू सेवन से तौबा करके इंसान ना सिर्फ खुद को बल्कि अपने परिवार, समाज और पर्यावरण की भी सुरक्षा करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे नशामुक्त भारत अभियान की भी सराहना की जो लोगों में नशे के प्रति जागरूकता सृजित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। साथ ही इस पुण्य कार्य के लिए समाज के लोगों एवं छात्र-छात्राओं से आगे आने की भी अपील की।