मेयर फंसे रिश्वतखोरी में, नगर आयुक्त ने बैठाई जांच

मथुरा। प्रॉपर्टी विवाद को हल कराने के नाम पर सुविधा शुल्क की डिमांड करने के फेर में मथुरा में नगर निगम के मेयर खुद विवादों में घिर गए हैं। उन पर 20 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष ने तंग आकर मेयर के खिलाफ जमकर हंगामा किया। विवाद को शांत कराने के लिए नगरायुक्त को जांच कमेटी गठित करने का आश्वासन देना पड़ा। सियासी गलियारों में यह मामला एकाएक सुर्खियों में आ गया है। नगर निगम में भी राजनीति गरमा गई है।

जानकारी के अनुसार मथुरा के अंतापाड़ा में लक्ष्मी चंद पाल सपरिवार रहते हैं। लक्ष्मी पाल की आर्य समाज रोड पर टेलर की दुकान है। वर्तमान में इस दुकान का मालिकाना हक उन्हीं पर है। यह नगर निगम की मार्केट है। इस मार्केट में 2 दुकान में से पूर्व मालिक पूरन चंद ने करीब डेढ़ दुकान एक आभूषण विक्रेता को बेच दी थी। शेष आधी दुकान में लख्मी चंद किराएदार हंै। उनका आरोप है कि इस दुकान को भी मेयर डॉ. मुकेश आर्य बंधु आभूषण विक्रेता को देना चाहते हैं। आरोप है कि इसके चलते मेयर ने 20 लाख रुपए की डिमांड की है।

लक्ष्मी चंद पाल का यह भी आरोप है कि आभूषण विक्रेता ने दुकान के इस हिस्से को अपने नाम कराने के लिए मेयर को 30 लाख रुपए दिए थे। इसकी जानकारी मिलने पर वह मेयर के पास पहुंचे। आरोप है कि मेयर ने न्याय करने की बजाए रिश्वत की डिमांड की। मेयर ने 20 लाख रुपए की मांग की। ऐसा न करने पर 15 लाख रुपए लेकर दुकान खाली करने की सलाह दे डाली। मेयर की इस सलाह को मानने से लक्ष्मी चंद ने साफ इंकार कर दिया। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह इतनी मोटी रकम देने में सक्षम नहीं हैं। चूंकि इस दुकान से उनके परिवार के 9 सदस्यों का गुजारा हो रहा है।

बताया गया है कि इसके बाद मेयर ने आभूषण विक्रेता के पक्ष में कोई कागज जारी कर दिया। इसकी जानकारी मिलने के बाद लक्ष्मी चंद सपरिवार जलकल परिसर भूतेश्वर में पहुंच गए। वहां उस समय नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक चल रही थी। इस परिवार ने वहां पहुंचकर मेयर मुकेश आर्य बंधू पर गंभीर आरोप लगाकर हंगामा खड़ा कर दिया। बाद में जैसे-तैसे पूरा मामला शांत हो सका। उधर, नगरायुक्त ने इस मामले में जांच कमेटी गठित की है। यह कमेटी लक्ष्मी चंद के आरोपों की जांच कर जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।