गांजा तस्करी के लिए बनवाया प्रेस का आईकार्ड, 3 लाख का गांजा बरामद

क्राइम ब्रांच की टीम ने फर्जी पत्रकार समेत दो तस्करों को किया गिरफ्तार

गाजियाबाद। हमारे देश के संविधान में मीडिया को लोकतंत्र के चार स्तम्भ में से एक मुख्य स्तम्भ माना गया है। मीडिया की समाज के प्रति देश के प्रति बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी होती है। यह एक ऐसा माध्यम से है जो जनता की आवाज को बुलंद करने के साथ-साथ सही राह पकडऩे को प्रेरित कर सकता है। साथ ही उनके असंगत कारनामो को जनता के समक्ष उजागर कर जनता को सावधान करने का काम करता है। लेकिन कुछ तथाकथित लोग लोकतंत्र के इस स्तम्भ को अपने फायदे के लिए बदनाम करने का प्रयास कर रहे है। पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए लाखों का खर्चा आता है। लेकिन आज के दौर में पढ़ाई की जरूरत नही है। सिर्फ कुछ पैसे देकर ही मीडिया का आईकार्ड तैयार हो जाता है और उसक दुरूपयोग करना भी शुरू  हो जाता है।
कुछ लोग पत्रकारिता का रौब दिखाकर अपना काम निकलवाने का काम करते है तो कुछ लोग मीठे बनकर अपना काम निकलवा लेते है। क्राइम ब्रांच की टीम ने एक ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया है। जिसने पैसे देकर पहले चैनल का आईकार्ड बनवाया और फिर उस आईकार्ड के जरिए गांजा तस्करी का कारोबार शुरू कर दिया। क्योंकि अक्सर चेकिंग में पुलिस प्रेस लिखी हुई गाडिय़ों को ही रोकती, अगर रोक भी ले तो आईकार्ड देखकर जाने देती है। जिसका फायदा उठाकर यह गंैंग पिछले करीब दो वर्षों से लगातार पुलिस की नाक के नीचे गांजा तस्करी का कारोबार कर रहा था और पुलिस को इसका पता भी नही था। क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपियों के पास से करीब 3 लाख रूपए कीमत का गांजा बरामद किया है।
क्राइम ब्रांच प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी ने बताया कि एसआई (नारकोटिक्स सैल) सौरभ शुक्ला की टीम ने शुक्रवार सुबह मुखबिर की सूचना पर मुरादनगर क्षेत्र से संजय शुक्ला पुत्र जगदीश, गौरव शुक्ला (फर्जी पत्रकार) पुत्र दीपचंद निवासी राधेश्याम बिहार फेस-2 मुरादनगर को गिरफ्तार किया है। जिसके कब्जे से 3 लाख रूपए कीमत का 12 किलो 600 ग्राम गांजा बरामद किया है। क्राइम ब्रांच प्रभारी ने बताया कि पकड़े गये आरोपी गौरव शुक्ला के पास से क्राइम न्यूज 24 चैनल का आईकार्ड बरामद किया गया। दोनों आरोपी आगरा से थोक में गांजा लाकर एनसीआर समेत विभिन्न क्षेत्रों में तस्करी करते थे। गांजा तस्करी के दौैरान कहीं अगर पुलिस उन्हें रोकती थी तो तुंरत आईकार्ड दिखाकर आसानी से बच जाते थे। सुबह भी आरोपी गांजा तस्करी के लिए स्कूटी की डिग्गी में भरकर जा रहे थे, जिन्हें चेकिंग के लिए रोका गया। तब गौरव ने अपना आर्ईकार्ड निकाला और अपना परिचय दिया। मगर पुलिस ने कार्ड देखने के बाद भी डिग्गी खोलने के लिए कहा तो फिर वह रौब दिखाने लगा। मगर पुलिस के आगे उनकी एक न चली और उनके गलत कामों का भंडाफोड़ हो गया। उन्होंने बताया कि आरोपित पिछले करीब दो वर्षों से गांजा तस्करी का कारोबार कर रहा था। आईकार्ड के बारे में पूछने पर उसने किसी भैैया का नाम बताया है, अब वह भैया कौन है, इसकी जांच की जा रही है। गांजा तस्करी के कारोबार में कई लोग शामिल है, जिन्हें जल्द गिरफ्तार लिया जाएगा।