-राजेन्द्र नगर में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत बने अतिरिक्त तल पर जीडीए की बड़ी कार्रवाई
-पुलिस बल की मौजूदगी में ढहाया गया अवैध निर्माण, निवासियों के विरोध के बावजूद नहीं रुका बुलडोजर
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जो निर्माण स्वीकृत मानचित्र से हटकर किया जाएगा, वह हर हाल में कानून के शिकंजे में आएगा। प्रवर्तन जोन-7 अंतर्गत साहिबाबाद के राजेंद्र नगर स्थित एक बहुमंजिला भवन के अवैध रूप से निर्मित अतिरिक्त तल को गुरुवार को जीडीए ने बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के निर्देश पर की गई, जिन्होंने इससे पहले पुलिस कमिश्नरेट को पत्र भेजकर पुलिस बल की मांग की थी, ताकि ध्वस्तीकरण के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजेन्द्र नगर सेक्टर-5 स्थित भूखंड संख्या 3/12 पर निर्माणकर्ता विनोद कुमार कौशिक द्वारा जीडीए से स्वीकृत मानचित्र के विपरीत एक अतिरिक्त मंजि़ल का निर्माण कर लिया गया था।
जीडीए की अनुमति में केवल दो मंजि़लों का निर्माण अध्यासित था, लेकिन नियमन की अनदेखी करते हुए तीसरी मंजि़ल खड़ी कर दी गई। जीडीए प्रवर्तन जोन-7 के प्रभारी मुख्य अभियंता आलोक रंजन के नेतृत्व में, सहायक अभियंता राजीव कुमार और अवर अभियंता राजेश शर्मा की टीम ने गुरुवार को जीडीए पुलिस बल और साहिबाबाद थाना पुलिस की उपस्थिति में इस अवैध मंजि़ल को बुलडोजर और हथौड़ों की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। जब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई, तो मौके पर रहने वाले कुछ निवासियों ने जमकर विरोध किया। मगर मौके पर मौजूद पुलिस बल ने लोगों को समझा-बुझाकर हटाया और कानून सम्मत कार्यवाही को निर्बाध रूप से पूरा कराया।
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक यह निर्माण 10 जनवरी 2023 को स्वीकृत मानचित्र से विचलन करके किया गया था। एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद निर्माणकर्ता ने न तो अनुमोदन लिया और न ही भवन को वैध कराने के प्रयास किए। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स लगातार निर्देशित कर रहे हैं कि शहर में स्वीकृत मानचित्र के उल्लंघन पर ‘शून्य सहिष्णुता नीति’ अपनाई जाए। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि कोई भी अवैध निर्माण, चाहे वह किसी भी स्तर पर हो, न बख्शा जाएगा और न ही सहन किया जाएगा। इस कार्रवाई के माध्यम से जीडीए ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास और निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्वीकृति और नियमों का पालन अनिवार्य है। बिना अनुमति निर्माण अब जोखिम नहीं, सीधे जवाबदेही और कार्रवाई की जद में है।

















