-रिक्त पड़े भूखंडों पर जीडीए का मास्टर प्लान तैयार
-10 वर्षों से नहीं बिके बड़े प्लॉट अब होंगे छोटे हिस्सों में तब्दील, जमीनों का भू-उपयोग भी बदला जाएगा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब शहर में जमींदोज पड़ी सरकारी संपत्तियों को लेकर गंभीर होता दिखाई दे रहा है। वर्षों से विभिन्न योजनाओं में रिक्त पड़े बड़े भूखंडों को अब छोटे टुकड़ों में बांटकर आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम ना केवल प्राधिकरण की राजस्व स्थिति को सुधारने की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है, बल्कि इससे शहर में रियल एस्टेट को भी नई रफ्तार मिलेगी। जीडीए सूत्रों के अनुसार, शहर की विभिन्न आवासीय और वाणिज्यिक योजनाओं में करीब दो हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले दर्जनों भूखंड ऐसे हैं जो पिछले एक दशक से खरीददार की राह देख रहे हैं।
इनमें कुछ भूखंड ग्रुप हाउसिंग, आर्ट गैलरी, सामुदायिक भवन जैसे विशेष प्रयोजनों के लिए आरक्षित हैं, लेकिन इनकी बिक्री या विकास न होने से न तो प्राधिकरण को राजस्व मिला और न ही जनता को कोई लाभ। अब प्राधिकरण इन भूखंडों की समग्र सूची तैयार कर उनका भू-उपयोग मूल्यांकन करवा रहा है। इसके बाद आवश्यकता पडऩे पर इनका भू-उपयोग बदलकर, उन्हें छोटे भूखंडों में पुन: डिजाइन कर बिक्री के लिए तैयार किया जाएगा। जीडीए की इस रणनीति का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बड़े भूखंडों को खरीदने में असमर्थ मध्यमवर्गीय लोग भी अब जीडीए संपत्ति के मालिक बन सकेंगे। इससे प्रॉपर्टी मार्केट में तेजी आएगी, जीडीए की राजस्व आय में बढ़ोतरी होगी, शहरी विकास को गति मिलेगी और अविकसित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का रास्ता खुलेगा।
बिक्री से पहले होगी कानूनी और तकनीकी समीक्षा
सूत्रों की मानें तो जीडीए की एक विशेष टीम इन भूखंडों की कानूनी स्थिति, पहुंच, आसपास की आबादी, मौजूदा उपयोगिता सेवाओं और संभावित मांग का गहन विश्लेषण कर रही है। इसके आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि भूखंड को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है, और क्या वहां आवासीय या वाणिज्यिक विकास संभव है।
निवेशकों के लिए अवसर की घड़ी
इस पहल को बाजार में निवेश के लिए सुनहरा मौका माना जा रहा है। प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन भूखंडों को बेचने के लिए ई-नीलामी या सीधी बिक्री मॉडल अपनाया जा सकता है। इससे प्रक्रिया पारदर्शी होगी और अधिक से अधिक लोगों को भागीदारी का अवसर मिलेगा।
संपत्तियों का होगा सर्वांगीण विकास
गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में इस प्रकार की योजना से न केवल जीडीए को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और शहरी जीवन स्तर में भी सुधार देखने को मिलेगा। यह एक ऐसा कदम है जो भूखंडों को निष्क्रियता से निकालकर उन्हें विकास के सक्रिय वाहक में तब्दील कर देगा।

जीडीए अपर सचिव
बीते कुछ महीनों में जीडीए की संपत्तियों के प्रति आम नागरिकों और निवेशकों की रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। लोग अब जीडीए की संपत्तियों को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित मानते हैं। इसी मांग को देखते हुए अब बड़े भूखंडों को छोटे भूखंडों में बदलने की योजना पर काम शुरू हो गया है। भू-उपयोग बदलने की प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी, ताकि भूखंडों को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुसार ढाला जा सके।
प्रदीप कुमार सिंह
जीडीए अपर सचिव
















