-असामनता का भाव समाप्त कर बच्चों को बनाना है शक्तिशाली: इन्द्र विक्रम सिंह
-चुप्पी तोड़ -हल्ला बोल परियोजना के अंतर्गत पोक्सो कमेटी प्रशिक्षण सत्र कार्यशाला का आयोजन
-माता-पिता/अध्यापिकाओं का बच्चों के संग दोस्ती का व्यवहार होना जरुरी
गाजियाबाद। ‘चुप्पी तोड़ -हल्ला बोल परियोजना के अंतर्गत न्यायपीठ बाल कल्याण समिति एवं समाधान अभियान संस्था और इंडिया पेस्टिसाइड्स लिमिटेड कंपनी ने संयुक्त रूप से पॉक्सो कमेटी प्रशिक्षण सत्र कार्यशाला का आयोजन किया। गुरुवार को विजयनगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में ‘पॉक्सो कमेटी प्रशिक्षण सत्रÓ कार्यशाला का जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जीपी भद्रदास, अर्चना अग्निहोत्री, कॉलेज प्रधानाचार्या डॉ. विभा चौहान सहित अन्य गणमान्यों ने द्वीप प्रज्जवलित किया। प्रतीक चिन्ह एवं शॉल ओढ़ाकर, पौधा भेंट कर अतिथियों का स्वागत सम्मान कार्यशाला का आयोजन किया।
जिलाधिकारी ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी तरूणा सिंह, आईएमई लॉ कॉलेज साहिबाबाद की प्रधानाचार्या डॉ. पूनम खन्ना, मोहननगर पिंक बूथ प्रभारी जूली सिंह, डॉ. कौमुदी, श्वेता शर्मा सदस्य बाल कल्याण समिति राखी गर्ग, संदीपा मलिक को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह एक शिक्षक के रुप में नजर आए। कार्यशाला में जिलाधिकारी ने बच्चों की कक्षा में पहुंचकर किताब पढ़ने के साथ कुछ देर के लिए शिक्षक की भूमिका भी अदा की। उन्होंने कहा कि कार्यशाला महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान समय में हमारी अर्थव्यवस्था बहुत आगे बढ़ चुकी है, लेकिन समाज में काफी कुरूतियां हैं। बालक-बालिका का उत्पीड़न होता है तो उसके लिए कानून व न्याय व्यवस्था है। कानून सख्त कर दिए गए है,मगर अपराध रूकने के नाम नहीं ले रहे।
इस पर गहराई से चिंतन करने की आवश्यकता है। माता-पिता व अध्यापकों को अपने बच्चों सहित अन्य बच्चों के साथ खुलकर उनके साथ दोस्ती के भाव से रहना चाहिए। हमें बालक-बालिकाओं को कमजोर नहीं बनाना है हमें उनके अंदर विश्वास जगाना है कि तुम कमजोर नहीं हो, तुम किसी भी परिस्थिति से लडऩे के काबिल हो,हमें तुम पर पूर्ण विश्वास है और हम तुम्हारे साथ हैं। जिला सूचना अधिकारी योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि समाज में नैतिकता और संवेदनशीलता की आवश्यकता है। हम जगह-जगह पर छोटे बच्चों को काम करते देखते हैं पर कुछ कहते नहीं हैं। बच्चों की सहायता के लिए अनेक संस्थाएं खोली गई हैं और न्यायपीठ द्वारा बाल कल्याण समितियों का पूर्ण सहयोग और समर्थन किया जाता है।
इसलिए आवश्यक है कि हम भी समाज में अपना सहयोग प्रदान करें और अनैतिक व्यवहार के प्रति आवाज उठाएं। कार्यक्रम में जिले में बनाई गई 400 पॉक्सो कमेटी के सभी सदस्यों ने भाग लिया। इसके साथ ही कॉलेज की अध्यापिकाएं, स्टॉफ, छात्राएं भी उपस्थित रहीं। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम शुभारंभ से पूर्व कॉलेज का निरीक्षण भी किया। उन्होंने छात्राओं से वार्ता की। उन्होंने जाना कि वर्तमान समय में अध्यापिकाओं और छात्राओं के बीच रिश्ता कैसा है,उनके पढ़ाने के तरीकों में क्या नई तकनीक आई हैं।



















