-पहले हो शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण उसके बाद होगी ऑनलाइन की बात: डॉ. अनुज त्यागी
गाजियाबाद। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में सोमवार से शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन हाजिरी लगाई जानी थी, जिसका लगभग जनपद के सभी विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा काली पट्टी बांधकर विरोध किया गया। शिक्षक अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर स्कूल में पहुंचे और ऑनलाइन हाजिरी का बायकाट किया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जाहिर किया। दरअसल, स्कूल शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेज कर निर्देशित किया था कि सभी परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा विद्यालयों में 25 जून से छात्रों की उपस्थिति पंजीकृत डिजिटल तौर पर कराई जाए। साथ ही सभी अध्यापकों की भी उपस्थित 8 जुलाई यानी सोमवार से कराई जाए।
जिसके आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए आदेश जारी कर दिए। इसके बाद से ही शिक्षकों द्वारा इसका विरोध जताना शुरु कर दिया गया। सोमवार को सभी शिक्षकों को ऑनलाइन हाजिरी लगानी थी, लेकिन उन्होंने हाजिरी लगाने की बजाय इसका बायकाट किया। सभी शिक्षकों ने अपने हाथों पर काली पट्टी बांधी और ऑनलाइन हाजिरी लगाने का विरोध किया। साथ ही काले पट्टे बांधकर छात्रों को प्रार्थना कराई और कक्षाओं में पढ़ाया। वहीं, केवल कुछ ही विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन हाजिरी लगाई गई। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ अनुज त्यागी ने बताया कि शासन के आदेश से शिक्षक संघ सहमत नहीं है। किसी भी शिक्षक साथी का अहित नहीं होने दिया जाएगा।
सभी शिक्षकों ने एकता दिखाते हुए सोमवार को ऑनलाइन हजारे का बायकाट किया है। जो कि आगे भी किया जाएगा। सभी ने अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर ऑनलाइन हाजिरी का विरोध जताया है। जनपद के सभी विद्यालयों में शिक्षकों ने हाजिरी नहीं लगाई है। पहले शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण किया जाए, उसके बाद ही ऑनलाइन हाजिरी की सरकार बात करें। प्रमुख समस्याओं का समाधान किए बिना ही विभागीय अधिकारियों द्वारा भय का वातावरण बनाकर डिजिटाइजेशन /ऑनलाइन उपस्थिति (फेस रिकग्निशन) की व्यवस्था केवल बेसिक शिक्षा विभाग में ही लागू की जा रही है। इससे पूरे प्रदेश का शिक्षक समाज स्वयं को अपमानित एवं ठगा महसूस कर रहा है और शिक्षकों में शासन व विभाग के प्रति व्यापक आक्रोश है।



















