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सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भर्ती में कमी को देख जिलाधिकारी हुए नाराज
गाजियाबाद। जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को कम भर्ती किए जाने पर जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने नाराजगी प्रकट करते हुए चिकित्सकों को जमकर फटकार लगाई। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.अखिलेश मोहन आदि अधिकारियों के साथ जिला स्वास्थ्य समिति के शासकीय निकाय की बैठक की। जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भर्ती एवं उपचार और योजनाओं का लाभ दिए जाने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी विशेष ध्यान दें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।
विगत वर्ष की भांति इस वर्ष ओपीडी में सेक्टर-23 संजय नगर स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय, लोनी एवं जिला महिला चिकित्सालय की उपलब्धि ऋणात्मक पाई गई। जिला महिला चिकित्सालय में पिछले वर्ष के सापेक्ष इस वर्ष 127 आईपीडी कम पाया गया। तत्पश्चात औसत ओपीडी प्रति डॉक्टर प्रति दिवस निकालने पर संयुक्त जिला अस्पताल की उपलब्धि जनपद में सबसे कम है। इस पर जिलाधिकारी ने फटकार लगाते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद चंद्र पांडेय को इसमें आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया। जनपद में 2,68,727 लोगों की आभा आईडी अभी तक नहीं बनाई गई है। इस पर चर्चा करने के बाद आशा के लेवल से पेंडिंग लाभार्थियों की आभा आईडी बनाने के लिए निर्देशित किया गया। ई संजीवनी के कार्य में प्रगति कम हुई है।
जनपद के सरकारी राजकीय चिकित्सालय में लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 84 प्रतिशत संस्थागत प्रसव किए गए। तत्पश्चात नोडल अधिकारी ने अवगत कराया कि निजी अस्पतालों द्वारा उक्त कार्य में रिपोर्ट कम की जा रही है। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.अखिलेश मोहन को आदेश दिए कि तत्काल सभी निजी अस्पतालों को नोटिस जारी करें और प्रतिमाह अपने अस्पताल में हुए संस्थागत प्रसवों का सम्पूर्ण विवरण कार्यालय को उपलब्ध करने के लिए आदेशित करें। उन्होंने कहा कि चिकित्सक अपने कार्यों के प्रति असंवेदनशील ना रहे। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करें और जन सेवा में भागीदारी निभाएं। मातृ मृत्यु समीक्षा में पाया गया कि अप्रैल से लेकर अगस्त तक 13 मातृ मृत्यु जनपद में संपन्न हुई है। इसकी विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने आदेश दिए कि सभी मातृ मृत्यु हुई महिला के क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग अपनी सेवाएं देना सुनिश्चित करें। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम,परिवार नियोजन,राष्ट्रीय टीकाकरण,टीवी उन्मूलन अभियान,अंधता निवारण अभियान,कुष्ठ उन्मूलन अभियान,एनएचएम से संबंधित वित्तीय व्यय की भी समीक्षा की गई।

















