यमुना प्राधिकरण का सख्त रूख, शिकायत पर लिया संज्ञान
ग्रेटर नोएडा। नामचीन अजनारा ग्रुप की मुश्किलें कम नहीं हो पाई हैं। बिल्डर साइट पर खुले कार्यालय से फ्लैटों की बिक्री करने की शिकायत मिलने पर यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) एकाएक हरकत में आ गया है। संबंधित कार्यालय को अब सील करने का निर्णय लिया गया है। उधर, निरस्त आवंटन की बहाल के लिए अजनारा ग्रुप ने आवेदन कर दिया है। आवंटन की बहाली से पहले आवंटी को भूखंड की वर्तमान कीमत का 10 प्रतिशत पैसा जमा करना होगा। यमुना प्राधिकरण को अजनारा ग्रुप की निरस्त साइट पर ऑफिस का संचालन कर फ्लैटों की बिक्री करने की शिकायत मिली थी।
शिकायत में कहा गया बिल्डर कार्यालय से फ्लैट बेचे जा रहे हैं। ऐसे में यमुना प्राधिकरण ने संबंधित कार्यालय को सील करने के निर्देश दिए हैं। सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने परियोजना विभाग को कार्यालय सील करने का आदेश दिया है। यमुना प्राधिकरण बिल्डर प्रोजेक्ट का फोरेंसिक ऑडिट कराएगा। इसके लिए एजेंसी का चयन किया जाएगा। सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि फॉरेंसिंक जांच के लिए जल्द एजेंसी का चयन किया जाएगा। अगर इस परियोजना का पैसा दूसरी जगह लगाया गया होगा तो कार्रवाई की जाएगी।
यमुना प्राधिकरण ने 2010 में अजनारा बिल्डर को सेक्टर-22 में 25 एकड़ भूमि आवंटित की थी। बिल्डर ने 2011 में इसकी रजिस्ट्री कराई थी। अजनारा पैनोरमा के नाम से यह प्रोजेक्ट है। यमुना प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट में 3266 फ्लैट का मानचित्र स्वीकृत किया। इस पर निर्माण कार्य शुरू किया। प्राधिकरण ने 695 फ्लैट का आंशिक पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया, मगर अजनारा बिल्डर बकाया पैसा नहीं जमा कर रहा। ऐसे में यमुना प्राधिकरण ने गत 4 मई को भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया था। निरस्त भूखंड का आवंटन बहाल कराने को अजनारा ग्रुप ने यमुना प्राधिकरण में आवेदन किया है।
ग्रुप ने बताया है कि उन्हें अभी तक आवंटन निरस्त करने के संबंध में कोई पत्र नहीं मिला है। 2 साल कोरोना महामारी का दौर रहा। नतीजन पैसा नहीं जमा कर पाए हैं। यह भी बताया गया कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में ब्याज दर को लेकर अदालत में मामला लंबित है। इसमें वह भी पार्टी हैं। इस फैसले का भी इंतजार कर रहे हैं। साथ बकाया का भुगतान करने की बात कही गई है। ग्रुप की तरफ से भूखंड आवंटन बहाल करने की मांग की गई है।
भूखंड आवंटन निरस्त होने के बाद बहाल करने की प्रक्रिया होती है। इसके तहत भूखंड की मौजूदा कुल कीमत का 10 प्रतिशत पैसा जमा करना पड़ता है। इसके बाद बहाली की कार्रवाई शुरू होती है। इसी के तहत आगे कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अरुणवीर सिंह
सीईओ
यमुना प्राधिकरण
















