Pakistan में अल्पसंख्यक नागरिकों की जिंदगी जहन्नुम से भी बदतर हो गई है। अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित रखने में इमरान खान सरकार बिल्कुल नाकाम है। उन्हें आए दिन प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है। बहुसंख्यकों की बढ़ती मनमानी के कारण असुरक्षा की भावना कम नहीं हो सकी है। कट्टरपंथी मुस्लिमों को मनमानी करने की जैसे छूट मिली हुई है। ठोस कार्रवाई न होने से कट्टरपंथियों के हौंसले बुलंद हैं। वह जब-तब हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में Pakistan को बार-बार समूची दुनिया के सामने शर्मसार होना पड़ता है।
Pakistan में ताजा घटनाक्रम Hindu temple में हमला होने का प्रकाश में आया है। सोशल मीडिया पर इस घिनौनी घटना का वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू समाज की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचा है। भारत के अलावा विभिन्न मुल्कों ने मुस्लिम कट्टरपंथियों की दबंगई और निर्लज्जता की घोर निंदा की है। Pakistan के पंजाब प्रांत के Hindu temple में कुछ मुस्लिम जबरन घुस जाते हैं। वहां शोर-शराबा मचाकर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित कर धार्मिक नारे लगाते हैं। जिस बेलगाम और बेखौफ अंदाज में हुड़दंगियों ने यह कायराना हरकत की, उससे साफ है कि उन्हें कानून व्यवस्था का कोई डर नहीं था।
Pakistan में अल्पसंख्यक समाज के धार्मिक स्थलों पर अक्सर इस प्रकार के हमले होते रहते हैं। अच्छी बात यह है कि ताजा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान ले लिया। सुप्रीम कोर्ट ने Hindu temple पर हमले, प्रतिमाओं को खंडित करने और धार्मिक स्थल को अपवित्र किए जाने की घटना पर काफी आक्रोश जाहिर किया है। शीर्ष अदालत ने पंजाब प्रांत के शीर्ष पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है। दोषियों के खिलाफ तत्काल ठोस कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रूख के बाद PM Imran Khan की भी नींद टूट गई। पीएम इमरान ने घटना पर खेद जताकर हिंदू मंदिर की मरम्मत कराने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा किए जाने की बात कही है। इमरान खान के आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। दरअसल Pakistan में मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे किसी का जोर नहीं चलता। न्यायपालिका और कार्यपालिका तक कोई विवाद बढ़ने की स्थिति में डैमेज कंट्रोल की कोशिश तो करती हैं, मगर भविष्य में परिस्थितियों में कोई सुधार देखने को नहीं मिलता। हिंदू मंदिर पर हमले के समय स्थानीय पुलिस-प्रशासन का मूकदर्शक बना रहा भी चिंता की बात है। विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का पालन न करने पर बुरी तरह घिरी पुलिस अब बचाव में तर्क दे रही है। यह तर्क इतने हास्यास्पद हैं कि कोई भी उन पर यकीन नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस अधिकारियों ने तर्क दिया है कि घटना के समय उनकी प्राथमिकता आस-पास रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करना था। इसलिए पुलिस ने मुस्लिम कट्टरपंथियों पर फौरी कार्रवाई से परहेज किया। बहरहाल दोषी पुलिस कर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है, यह समय बताएगा। इस प्रकरण में एक और तथ्य ऐसा सामने आया है, जिससे Pakistan में मुस्लिम कट्टरपंथियों के कृत्यों को बढ़ावा मिलना तय है।
Hindu temple पर हमले से उभरे विवाद के उपरांत मिल्ली यकजेहती काउंसिल नामक संगठन खुलकर हमलावरों के समर्थन में उतर आया है। इस संगठन ने गणेश मंदिर में तोड़-फोड़ और मूर्तियों को अपवित्र किए जाने की निंदा से साफ इनकार कर दिया है। 22 धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों को मिल्ली यकजेहती काउंसिल लीड करता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक काउंसिल के प्रतिनिधि अबुल खैर जुबैर ने कहा है कि शरिया कानून और संविधान के तहत अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित हैं, मगर बहुसंख्यकों को अधिकार न दिया जाना भी उचित नहीं है। एक तरह से इस काउंसिल ने कट्टरपंथी मुस्लिमों की बेजां हरकत को सही ठहराने की कोशिश की है।
Pakistan में हिंदू, ईसाई, यहूदी और सिख इत्यादि अल्पसंख्यक वर्ग की श्रेणी में आते हैं। वहां अल्पसंख्यकों की आबादी निरंतर कम हो रही है। इस कारण जबरन धर्मांतरण है। Pakistan में यदि कोई अल्पसंख्यक आसानी से मुस्लिम धर्म को नहीं अपनाता है तो उसे तरह-तरह के अत्याचार का शिकार होना पड़ता है। हिंदू, क्रिश्चयन और सिख समुदाय की किशोरियों और युवतियों को दिनदहाड़े अगवा कर धर्म परिवर्तन कराने के मामले आए दिन सुर्खियों में रहते हैं। अपने अधिकारों की आवाज उठाने पर अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जाता है। पुलिस-प्रशासन में सुनवाई नहीं होती। विभिन्न राजनीतिक दल भी अक्सर घटना की निंदा कर औपचारिकता का निर्वहन कर देते हैं।
कुछ माह पहले PM Imran Khan ने एक हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए सरकारी खजाने से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इमरान खान का यह कदम कट्टरपंथी संगठनों को नागवार गुजरा था। इन संगठनों ने पूरा देश सिर पर उठाकर विरोध शुरू कर दिया था। नतीजा यह रहा कि कट्टरपंथी संगठनों के दबाव में आकर PM Imran Khan को बैकफुट पर आना पड़ा। Pakistan में ईश निंदा कानून के नाम पर भी अल्पसंख्यकों का खूब उत्पीड़न हो रहा है। प्रताड़ना का विरोध करने पर आमतौर पर अल्पसंख्यक नागरिक पर ईश निंदा कानून के उल्लंघन का मनगढ़ंत आरोप लगाकर उसे जेल भिजवा दिया जाता है।
ईश निंदा कानून में दोषी पाए जाने पर आरोपी को फांसी की सजा देने तक का प्रावधान है। बहरहाल Pakistan में अल्पसंख्यकों के हालात में सुधार की दूर-दूर तक कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। Pakistan को कम से कम बांग्लादेश से सबक लेने की जरूरत है। बांग्लादेश सरकार ने कट्टरपंथियों पर नकेल कसने को हरसंभव कदम उठाए हैं। इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। दरअसल कट्टरपंथी सोच देश एवं समाज हित में नहीं है। इससे शांति एवं कानून व्यवस्था को सबसे बड़ा नुकसान होता है। दुनियाभर में बार-बार शर्मसार होने से बचने के लिए Pakistan सरकार को कट्टरपंथी मुस्लिमों पर शिकंजा कसना चाहिए।
















