उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति ग्रेटर नोएडा ने आयोजित की श्रद्धांजलि सभा
ग्रेटर नोएडा। देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के आकस्मिक निधन से हर कोई स्तब्ध है। तमिलनाडु में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस बिपिन रावत, उनकी धर्मपत्नी मधुलिका रावत एवं 11 सैन्य अधिकारियों के निधन ने देशभर में शोक की लहर है। दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए निरंतर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हो रही हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति ग्रेटर नोएडा ने गामा-1 कम्युनिटी सेंटर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस दौरान 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
श्रद्धांजलि सभा में उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत ने कहा कि शहीद बिपिन रावत एक राष्ट्रभक्त सैन्य अधिकारी थे। उन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया। सीडीएस रावत का निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है। देश की सेना एवं सीमाओं की रक्षा के लिए जनरल बिपिन रावत के योगदान को देश हमेशा याद रखेगा। वक्ता नंदकिशोर सुंदरियाल ने कहा कि जनरल बिपिन रावत के निधन से समूचे देश में शोक की लहर है। देश के प्रति जनरल रावत की कर्तव्यनिष्ठा को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
इस अवसर पर जैनेंद्र रावत, रमेश चंद्र बिजल्वाण, आर.सी. शर्मा, डीएस नेगी, तारा दत्त शर्मा, बच्ची राम रतूड़ी, नंदकिशोर सुंदरियाल, सत्येंद्र नेगी, ललित पडलिया, अजेंद्र रावत, सुबोध नेगी, अशोक उपाध्याय, केएन लखेड़ा, चंद्रा नौटियाल, एमसी भट्ट, सुभाष मुंडेपी, राजपाल रावत, मोहन ढौंडियाल, सुनील दत्त सिलवाल, सुभाष कोटनाला, संतोष शाह, राजू सनवाल, एल.के. जोशी, हेम चंद तिवारी, शंकर कांडपाल, हेम चंद भट्ट, डीसी तिवारी, सुशील डबराल, दिनेश लमकोटी, दिनेश कुंजवाल, आशीष जुयाल, श्रीमती लखेड़ा आदि सदस्य मौजूद रहे।
हमेशा याद रहेगा उत्तराखंड का लाल
भारत ने 8 दिसम्बर 2021 को अपने पहले चीफ आॅफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल विपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 सैन्य अधिकारी व सुरक्षा कर्मियों को हवाई दुर्घटना में खो दिया। जनरल रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के सैणा गांव में हुआ था। उनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत सेना से लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। बिपिन रावत की शुरूआती पढ़ाई देहरादून में, कैंब्रियन हॉल स्कूल, शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल से हुई। उसके बाद उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से स्नातक उपाधि हासिल की। आईएमए में उन्हें असाधारण कौशल के लिए स्वोर्ड आॅफ आॅनर से भी सम्मानित किया गया था। जनरल रावत पहली बार मिजोरम में 16 दिसंबर 1978 को मात्र 20 वर्ष की उम्र में 11वीं गोरखा रायफल की 5वीं बटालियन में कमीशंड अफसर के तौर पर शामिल हुए थे।
43 साल की सेवा में अनेक उपलबिधयां अर्जित की
विपिन रावत ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से पीएचडी कर डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण की। इसके पश्चात आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका के आर्मी कमांड व जनरल स्टाफ कॉलेज गए। उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल, मैनेजमेंट में डिप्लोमा और कंप्यूटर स्टडीज में भी डिप्लोमा किया। वे पहले लेफ्टिनेंट फिर कैप्टन फिर मेजर और सन 2007 में ब्रिगेडियर बने। इसके ठीक 10 साल बाद 1 जनवरी 2017 में उन्हें थल सेना अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया। अपनी 43 साल की सेवा में उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कर देश का गौरव बढ़ाने का हरसंभव प्रयास किया। उनकी कार्य कुशलता और बॉर्डर क्षेत्र में तजुर्बे की दक्षता को देखकर भारत सरकार ने जनरल रावत को 2019 में तीनों सेना का प्रमुख यानी चीफ डिफेंस आॅफ स्टाफ (सीडीएस) बनाया, मगर 8 दिसम्बर के मनहूस दिन ने हम सब भारतवासियों से देश का सबसे जांबाज योद्धा छीन लिया।
















