हिंडन नदी को स्वच्छ निर्मल बनाने के लिए स्वयं होना पड़ेगा जागरूक: सीडीओ

-हिंडन नदी के सौंदर्यीकरण, प्रदूषण मुक्त, अविरल व स्वच्छ बनाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक संपन्न
-हिंडन नदी पर रिवर फ्रंट विकसित कर, हरनंदी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के निर्देश

गाजियाबाद। हिंडन नदी को प्रदूषण मुक्त किए जाने एवं उसको पुरातन पहचान दिए जाने को लेकर बुधवार को जिलाधिकारी के निर्देशन में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) विक्रमादित्य सिंह मलिक की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट के महात्मा गांधी सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीडीओ ने कहा हिंडन नदी हमारे देश की सांस्कृतिक महारेखा है। नदिया मोक्षदायिनी माता है जो हमारे देश के हर प्राणी को अपने जल से शुद्ध करती हैं। आज घाटो के आसपास विभिन्न लोगों द्वारा गंदगी करने की कोशिश की जाती है जिसके बचाव के लिए हमें हिंडन नदी रूपी महारानी माता को निर्मल स्वच्छ बनाने के लिए स्वंय को जाग्रति होने पडेगा।

उन्होंने कहा कि हिंडन नदी का न सिर्फ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि जनपद की आबादी के जीवन से सीधा संबंध जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके प्रति लोगों को जागरूक करना भी आवश्यक है ताकि वे अपने घरों से निकलने वाली दूषित पानी या कचड़ा नाला में नहीं फेंके। यही दूषित व कचड़ायुक्त पानी विभिन्न बहाव माध्यमों से हिंडन नदी में समाहित होकर उसे प्रदूषित करता है। इससे जलीय जीवों एवं हमारे रोजमर्रा के जिंदगी में प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके साथ-साथ यह पानी भू-गर्भ में जाकर जलस्तर को प्रदूषित कर देती है।

उन्होंने कहा कि हिंडन नदी सांस्कृतिक धरोहर और आस्था का प्रतीक है। इस संबंध में उन्होंने आम जनमानस से आह्वान करते हुए कहा कि कोई भी हिंडन नदी में कचरा, पॉलीथिन, पूजा सामग्री आदि नहीं फेंकेगा। हिंडन जो कभी हरनन्दी नदी के नाम से पहचानी जाती थी लिहाजा नदी को पुरातन पहचान दिलाने के लिए हम सबको आगे आना होगा। स्वच्छ पर्यावरण एवं नदियों को प्रदूषण मुक्त किए जाने एवं उसको पुरातन पहचान दिलाना हम सबका नैतिक कर्तव्य एवं जिम्मेदारी है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी द्वारा हिंडन नदी को अविरल एवं स्वच्छ बनाने के संबंध में विभिन्न विभागों के द्वारा कराये जाने वाले कार्यो की बारीकी से जानकारी ली गई। हिंडन नदी के किनारे बसे प्रत्येक ग्राम में एवं नगर पालिकाओं में हिंडन नदी की सफाई के लिये कार्ययोजना बनाकर कार्य किए जाएं। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों से उनके क्षेत्रों में उपलब्ध काम्पेक्टर मशीन, कूड़ा सग्रेगेशन, डंम्पिंग यार्ड, मलमूत्र एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी संकलित की जाए। बल्क वेस्ट जनरेटर को चिन्हित करें एवं नदी किनारे बसावटों में जहां भी कूडा व गंदे नाले सीधे नदी में डाले जा रहे हैं, उन स्थानों को चिन्हित कर इसकी रिपोर्ट उपलब्ध करें।

प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों से बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण की नियमित जांच की जाए। एंटी स्पिटिंग व पालिथिन का इस्तेमाल पर सख्ती से चालान काटे जाए। हिंडन नदी में गिरने वाले औद्योगिक कचरे से फैक्ट्रियों के दूषित केमिकलयुक्त पानी को रोकने के लिए उद्योगों की मैपिंग करने के निर्देश दिए। विगत बैठक में सीडीओ विक्रमादित्य सिंह मलिक द्वारा संबंधित विभागीय अधिकारियों को हिंडन नदी पर रिवर फ्रंट विकसित करते हुए हरनंदी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए अपनी अपनी विभागीय कार्य योजना प्रस्तुत करने के निर्देश के क्रम में जीडीए, आवास विकास, नगर निगम एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी कार्य योजना प्रस्तुत की एवं हिंडन नदी जिन-जिन ग्रामों से होकर गुजर रही है, उसके संबंधित लेखपाल एवं ग्राम प्रधानों ने अभिलेखों में दर्ज नदी, चारागाह की भूमि पर अवैध अतिक्रमण को हटवाने एवं वृक्षारोपण के संबंध में जानकारी दी। बैठक में समस्त उपजिलाधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए पीएन दीक्षित, नगर निगम, कृषि विभाग, सिंचाई विभाग, जिला पंचायत राज अधिकारी, पशुपालन विभाग, प्रदूषण विभाग, जिला उद्योग केंद्र सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।